कृषि मंत्री ने की उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के कार्यों की समीक्षा

लखनऊ, 29 जनवरी (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने गुरूवार को आलमबाग स्थित उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार) के सभागार में एक विभागीय समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उपकार के प्रतिनिधिमंडल द्वारा एक्रीसेट और समिटि की संस्तुतियों, विशेष रूप से कृषि शिक्षा एवं कृषि अनुसंधान के वर्गीकरण को अलग-अलग करने तथा उनके क्रियान्वयन योग्य पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक के दौरान अरहर सहित अन्य दालों की उत्पादकता बढ़ाने, कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि विभाग के फार्मों की कार्यप्रणाली और अनुसंधान के विभिन्न विषयों की गहन समीक्षा की गई।

कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को बदलते मौसम के मिजाज और किसानों की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखकर शोध कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध कार्यों के लिए आवंटित बजट और संसाधनों का परिणाम धरातल पर दिखना चाहिए ताकि किसानों को इसका सीधा लाभ मिल सके। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नई किस्मों के विकास (वैरायटी डेवलपमेंट) के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में कुल उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाए।
कृषि मंत्री ने वैज्ञानिकों को निर्देशित किया कि वे वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग करते हुए बेहतर जर्मप्लाज्म तैयार करें और गुणवत्तापूर्ण बीजों के विकास की दिशा में तेजी से कार्य करें। किसानों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने एक ऐसी प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए जिससे मौसम संबंधी सटीक जानकारी तत्काल किसानों के मोबाइल तक पहुंच सके, ताकि प्रतिकूल मौसम से होने वाले नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।
इस अवसर पर सचिव कृषि इंद्र विक्रम सिंह, अध्यक्ष उपकार कैप्टन विकास गुप्ता, निदेशक कृषि डॉ. पंकज त्रिपाठी, महानिदेशक उपकार डॉ. संजय सिंह विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के कृषि वैज्ञानिक तथा कृषि विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन
