नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। रेल मंत्रालय ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत बैकुंठ से उरकुरा के बीच चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान कर दी है। 26.40 किलोमीटर लंबी इस रेल परियोजना पर लगभग 426.01 करोड़ रुपये की लागत आएगी। यह रेलखंड मुंबई–हावड़ा उच्च घनत्व मार्ग का हिस्सा है, जिसे देश के सबसे व्यस्त रेल कॉरिडोरों में गिना जाता है।

रेल मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि बैकुंठ–उरकुरा सेक्शन बिलासपुर–रायपुर–नागपुर मुख्य लाइन का अहम हिस्सा है, जहां मौजूदा समय में रेल यातायात पूरी क्षमता पर संचालित हो रहा है। ऐसे में चौथी लाइन के निर्माण से इस खंड पर दबाव कम होगा और ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारु बन सकेगा।

नई रेल लाइन से यात्री और कोचिंग ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी, जिससे देरी में कमी आएगी और समयपालनता में उल्लेखनीय सुधार होगा। इसके साथ ही मालगाड़ियों की आवाजाही भी अधिक भरोसेमंद और तेज हो सकेगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 14.25 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता सृजित होगी, जिससे भारतीय रेल को पहले ही वर्ष से लगभग 61.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आय होने का अनुमान है।
क्षेत्र में बिजली संयंत्रों, कोयला खदानों, इस्पात एवं सीमेंट उद्योगों के तेजी से विस्तार को देखते हुए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नई लाइन से कोयला, स्टील, सीमेंट और अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन को गति मिलेगी, जिससे औद्योगिक विकास और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।
यह परियोजना एनर्जी, सीमेंट एवं मिनरल कॉरिडोर के अंतर्गत चिन्हित की गई है, जो आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में रेलवे अवसंरचना को सशक्त बनाने की दिशा में भारतीय रेल का एक और बड़ा कदम है।
परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रियों को तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा सुविधा मिलेगी, वहीं माल परिवहन क्षमता में वृद्धि से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार
