मुंबई, 29 जनवरी (हि.स.)। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद भी उनके मातहत रहे वित्त विभाग ने अपने काम का अनुशासन बनाए रखा है। आने वाले वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट प्लान को फाइनल करने का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है। तब तक गैर-ज़रूरी खर्चों में कटौती करने के लिए फंड बांटने की नई लिमिट तय कर दी गई है। गुरुवार को वित्त विभाग के जारी फैसले का सीधा असर अलग-अलग विकास कार्यों की रफ़्तार पर पड़ने की संभावना है।

वित्त विभाग ने साफ किया है कि जिला वार्षिक योजना, विधायक फंड और सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम के लिए 100 प्रतिशत फंड दिया जाएगा। हालांकि कई दूसरे विभागों के खर्चों में कटौती की गई है। कर्मचारियों का वेतन (95 प्रतिशत) और पेंशन (100 फीसदी) को प्राथमिकता दी गई है। लेकिन ऑफिस खर्च, किराया, टेलीफोन और बिजली बिल (एडमिनिस्ट्रेटिव खर्च) के लिए सिर्फ 80 प्रतिशत निधि ही दी जाएगी। विशेष सूची में जिन योजनाओं का जिक्र नहीं है, उनके लिए फंड की लिमिट 70 प्रतिशत होगी। विभागों को अब विज्ञापन, पब्लिसिटी, विदेश यात्रा, नई गाड़ियों की खरीद और बड़े कंस्ट्रक्शन जैसे खर्चों के लिए वित्त विभाग से खास अनुमति लेनी होगी। ऐसे प्रपोजल 12 फरवरी 2026 तक जमा करने के आदेश दिए गए हैं। राज्य सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि इस डेडलाइन के बाद मिलने वाले किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राज्य सरकार ने एडमिनिस्ट्रेटिव विभागों को सख्त चेतावनी दी है कि उपलब्ध कराए गए फंड को किसी भी हालत में निजी बैंकों या ‘प्राइवेट लेंडिंग’ (पीएलए) अकाउंट में न रखा जाए। निर्देश दिया गया है कि जो फंड खर्च नहीं होते हैं, उन्हें तुरंत सरकार के पास जमा कर दिया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार
