-बदरी-केदार में क्यूआर कोड दान मामला

देहरादून, 29 जनवरी (हि.स.)। राज्य सूचना आयोग ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा 2023 में बदरी-केदार धामों में लगाए गए क्यूआर कोड बोर्ड से जुड़े मामले में बदरीनाथ कोतवाली के लोक सूचना अधिकारी को चेतावनी दी है। आयोग ने कहा है कि भविष्य में न्यायालय का बहाना बनाकर सूचना के अधिकार में बाधक न बनें।

राज्य सूचना आयुक्त कुशला नन्द ने एक अपील की सुनवाई के बाद अपने आदेश में कहा है कि यदि प्रकरण न्यायालय में गतिमान है और सूचना उपलब्ध कराने से जांच प्रभावित हो सकती है तो उस दशा में सूचना नहीं उपलब्ध कराई जाएगी। मगर जांच पूरी हो चुकी हो तो प्रकरण न्यायालय से संबंधित होने पर सूचना को रोका नहीं जा सकता है। प्रकरण न्यायालय से संबंधित होना सूचना अधिकार में कहीं आड़े नहीं आता है।
सूचना आयुक्त ने अपने आदेश में सूचना अधिकार अधिनियम की धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा है कि उन्हीं सूचनाओं को रोका जा सकता है, जिसके प्रकाशन को किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा निषिद्ध किया गया हो, अथवा जिसके प्रकटीकरण से न्यायालय का अवमान होती है, या ऐसी सूचनाएं जिनके प्रकटन से अपराधियों के अन्वेषण, पकड़े जाने या अभियोजन की क्रिया में अड़चन आएगी।
दरअसल, यह प्रकरण वर्ष 2023 में बदरी- केदार धामों में लगे क्यूआर कोड से जुड़ा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ता अनिल मोहन सेमवाल ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत क्यू आर कोड मामले में चमोली पुलिस से छह बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। उन्होंने श्री बदरीनाथ- केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) द्वारा इस मामले को लेकर बदरीनाथ कोतवाली में दर्ज प्राथमिकी पर हुई कार्रवाई का पूर्ण विवरण मांगा था।
मगर बदरीनाथ थाने के प्रभारी कोतवाल ने बतौर लोक सूचना अधिकारी सेमवाल को मात्र एक बिंदु की सूचना के रूप में एफआईआर की कॉपी उपलब्ध करा दी बाकी बिंदुओं के लिए लोक सूचना अधिकारी ने प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन होने का हवाला देते हुए सूचना उपलब्ध कराने में असमर्थता जता दी।
सेमवाल ने लोक सूचना अधिकारी के जवाब के विरुद्ध प्रथम अपीलीय अधिकारी पुलिस उपाधीक्षक, चमोली के समक्ष अपील की। सेमवाल ने अपनी अपील में न्यायालय में विचाराधीन मामलों में केंद्रीय सूचना आयोग द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों का संदर्भ दिया और लोक सूचना अधिकारी पर सूचना उपलब्ध कराने में अनावश्यक बाधा पैदा करने की बात कही। प्रथम अपीलीय अधिकारी के स्तर से भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सेमवाल ने राज्य सूचना आयोग में अपील की थी, जिस पर सूचना आयुक्त कुशला नंद ने यह आदेश दिया है।
बीकेटीसी के पूर्व अध्यक्ष अजेंद्र मामले में राज्य सूचना आयोग के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अजेंद्र ने इसे स्वागत योग्य बताया है। साथ ही उन्होंने इस प्रकरण में चमोली पुलिस के रवैये पर असंतोष व्यक्त किया और कहा कि पुलिस ने मामले में शुरुआत से सुस्ती अपनाई। उन्होंने कहा कि जैसा कि आरटीआई के माध्यम से यह तथ्य भी सामने आया है कि पुलिस ने कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी है। अजेंद्र ने प्रदेश सरकार से इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की और कहा कि वे स्वयं मुख्यमंत्री को जांच के बावत पत्र भी लिखेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ विनोद पोखरियाल
