उदयपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। उदयपुर संभाग के सलूंबर जिले के प्रसिद्ध आस्था केंद्र ईडाणा माता मंदिर में गुरुवार सुबह एक बार फिर अलौकिक और चमत्कारी दृश्य देखने को मिला, जब करीब 11 माह के अंतराल के बाद माताजी ने अग्नि स्नान किया। सुबह लगभग 8 बजकर 50 मिनट पर मंदिर परिसर में स्वयं अग्नि प्रज्वलित हुई और देखते ही देखते आग की लपटें 12 फीट से अधिक ऊंचाई तक उठने लगीं। इस दौरान आसमान में काले धुएं का गुबार दिखाई दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में श्रद्धा और कौतूहल का वातावरण बन गया।

अग्नि स्नान की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में एकत्र हो गए। भक्तों ने इस दुर्लभ और दिव्य दृश्य के दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली माना तथा माता रानी के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार जब ईडाणा माता अपने भक्तों से प्रसन्न होती हैं, तब मंदिर में अपने आप अग्नि प्रज्वलित होती है। इस अग्नि स्नान का कोई निश्चित दिन या समय नहीं होता, यह पूर्णतः माता की इच्छा पर निर्भर माना जाता है। इससे पूर्व माताजी ने 18 मार्च 2025 को अग्नि स्नान किया था। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि इस अलौकिक दृश्य के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि जैसे ही अग्नि स्नान प्रारंभ हुआ, भक्त हाथ जोड़कर माता की आराधना में लीन हो गए।
परंपरा के अनुसार अग्नि स्नान के दौरान मंदिर में रखी चुनरी, नारियल सहित अन्य पूजन सामग्री भस्म हो जाती है। कई बार आग इतनी प्रचंड होती है कि आसपास के पेड़ों को भी नुकसान पहुंच जाता है। इसके बावजूद यह श्रद्धा का विषय है कि आज तक माताजी की प्रतिमा और उनके आभूषणों को कोई क्षति नहीं पहुंची, जिसे भक्त माता की महिमा और चमत्कार का प्रतीक मानते हैं।
ईडाणा माता बरगद के विशाल वृक्ष के नीचे विराजमान हैं। मेवाड़ क्षेत्र के ईडाणा गांव सहित आसपास के करीब 52 गांवों के लोग इस मंदिर में गहरी आस्था रखते हैं। मंदिर में प्रतिमा के पीछे त्रिशूल लगे हुए हैं। भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर यहां त्रिशूल चढ़ाते हैं, वहीं संतान प्राप्ति की कामना करने वाले श्रद्धालु झूले अर्पित करते हैं।
मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्रचलित मान्यता के अनुसार यहां दर्शन करने और माता की कृपा से लकवा (पैरालिसिस) से ग्रसित रोगी स्वस्थ हो जाते हैं। इसी विश्वास के चलते दूर-दराज से रोगी और उनके परिजन यहां आते हैं।
ईडाणा माता का अग्नि स्नान केवल एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आस्था, विश्वास और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। गुरुवार को हुए इस अग्नि स्नान ने एक बार फिर श्रद्धालुओं की आस्था को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया, वहीं इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बने भक्तों के लिए यह क्षण जीवनभर की स्मृति बन गया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता
