चंडीगढ़, 29 जनवरी (हि.स.)। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत चल रहे राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए) में वर्ष 2026 में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के विस्तार को लेकर पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स शुरू किया जाएगा। संस्थान की ओर से नए गुरुवार को कोर्स की अधिसूचना जारी कर दी गई है।

राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब पमनानी के नेतृत्व में ओपीडी सेवाओं सुदृढ़ करने के साथ शैक्षणिक पाठ्यक्रमों के विस्तार पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

एनआईए प्रवक्ता के अनुसार, पंचकर्म टेक्नीशियन सर्टिफिकेट कोर्स की अवधि एक वर्ष निर्धारित की गई है। कोर्स के लिए पंजीकरण शुल्क 500 रुपये रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक युवाओं को आयुर्वेद से जुडऩे का अवसर मिल सके। इस कोर्स का उद्देश्य पंचकर्म चिकित्सा में तकनीकी रूप से युवाओं को प्रशिक्षित करना है, जोकि आयुर्वेदिक अस्पतालों, पंचकर्म केंद्रों और वेलनेस संस्थानों में अपनी सेवाएं दे सकेंगे।
प्रशिक्षित पंचकर्म टेक्निशियन आयुर्वेदिक उपचार प्रणाली की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे। यह कोर्स विशेष रूप से उन युवाओं के लिए लाभकारी सिद्ध होगा, जो स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं। इसके साथ आयुर्वेदिक स्वास्थ्य सेवाओं में करियर बनाने वाले युवाओं को नया मंच मिलेगा।
पंचकर्म विभाग के सहायक आचार्य डॉ.अनुराग कुशल ने बताया कि संस्थान के पंचकर्म कक्ष में वमन, विरेचन, बस्ती, शिरोधारा, अभ्यंग आदि उपचार की सेवा उपलब्ध है। चिकित्सालय में भर्ती रोगियों के लिए प्रतिदिन पंचकर्म थैरपी तथा फिजियोथेरेपी का लाभ दिया जा रहा है। संस्थान की ओर से ईसीजी, लैब टेस्ट, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे की सुविधा भी शुरू की गई है, जिसमें हर रोज बड़ी संख्या में रोगी चिकित्सालय में उपचार एवं सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा
