आसनसोल, 29 जनवरी (हि. स.)। कोलकाता में एक निजी मोमो कंपनी के आउटलेट और गोदाम में आग लगने से कई श्रमिकों की मौत हो गई। इस घटना के खिलाफ गुरुवार को रानीगंज के एनएसबी रोड इलाके में स्थित वाउ मोमो निजी कंपनी के आउटलेट के सामने वामपंथी श्रमिक संगठन सीटु तथा डीवाईएफआई के तरफ से संयुक्त रूप से विरोध प्रदर्शन किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने अग्निकांड में मृत श्रमिकों के परिवारों को मुआवजा देने उनके आश्रितों को नौकरी देने और उनके परिवार को श्रमिकों का आजीवन वेतन प्रदान करने की मांग की गयी। इस मौके पर यहां सीटु नेता हेमंत प्रभाकर तथा डीवाईएफआई नेता गौरव ढल्ल सहित दोनों संगठनों के अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।

यहां हेमंत प्रभाकर ने कहा कि कोलकाता के इस निजी मोमो कंपनी के गोदाम और आउटलेट में जो अग्निकांड की घटना में कई श्रमिकों की मौत हो गई। लेकिन राज्य सरकार इस पर पूरी तरह से खामोश है। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर वह कारखाना बना है। वह जगह कारखाना बनने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। फिर भी किसकी अनुमति से वहां पर वह कारखाना चल रहा था। यह जांच का विषय है।
उन्होंने कहा कि अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 40 लोग अभी भी लापता है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह इस मामले का संज्ञान ले और पूरी घटना पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें। उन्होंने इस पूरे मामले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफा देने की मांग की।
डीवाईएफआई नेता गौरव ढल्ल ने भी इस पूरे मामले पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि जिस तरह से निजी मोमो कंपनी के गोदाम और आउटलेट में दुर्घटना हुई है उससे साफ जाहिर होता है कि पश्चिम बंगाल में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन कितने उदासीन है। उन्होंने कहा कि कारखाना प्रबंधन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है क्योंकि चाहे वर्तमान सत्ता पक्ष हो या नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी सभी इसमें मिले हुए हैं।
उन्होंने कहा कि इस कारखाने के मालिक पश्चिम मेदिनीपुर के निवासी हैं और उनके तार शुभेंदु अधिकारी से जुड़े हैं। इसलिए वह भी इस पर खामोश हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस पूरे मामले पर वामपंथी ही शुरू से आंदोलन कर रहे हैं और यही वजह है कि आज यह मामला सुर्खियों में आया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा
