धर्मशाला, 29 जनवरी (हि.स.)।

हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन जिला कांगड़ा इकाई के अध्यक्ष कैप्टन (डॉ.) उदय सिंह एवं कोषाध्यक्ष डॉ. सुनील भट्ट ने वीरवार को कृषि मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। वीरवार को धर्मशाला में सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों के कैडर से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों को उजागर किया गया तथा मुख्यमंत्री तक इन विषयों को पहुंचाने का आग्रह किया गया। कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने ज्ञापन में उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए इन समस्याओं के समाधान हेतु ठोस प्रयास करने का दृढ़ आश्वासन दिया। सबसे प्रमुख मांग महंगाई भत्ता को लेकर उठाई गई। एसोसिएशन ने मांग की कि सरकार चिकित्सा अधिकारियों को शीघ्र डीए जारी करे ताकि उन्हें समय पर राहत मिल सके।

इसके अलावा जॉब ट्रेनी पॉलिसी को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज किया गया। एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि मेडिकल ग्रेजुएट्स पहले ही मेडिकल कॉलेजों में एक वर्ष की रोटेटरी इंटर्नशिप पूरी करते हैं, ऐसे में सरकारी सेवा में नियुक्ति के समय ट्रेनी बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल सरकार की जॉब ट्रेनी पॉलिसी, नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के विरुद्ध लागू की गई है। नॉन प्रैक्टिस अलाउंस (एनपीए) को लेकर भी सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की गई। एसोसिएशन ने कहा कि चिकित्सा अधिकारियों को उनके ज्वाइनिंग डेट से ही एनपीए बहाल किया जाना चाहिए।
बैठक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की भारी कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। बताया गया कि रक्कड़, कस्बा कोटला, गारली, ब्लॉक दाड़ीसा सहित कई क्षेत्रों में केवल एक ही मेडिकल ऑफिसर तैनात है, जिन्हें 24 घंटे सेवाएं देनी पड़ रही हैं। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि जब तक नए डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक ऐसे सीएचसी में नाइट ड्यूटी को समाप्त किया जाना चाहिए, ताकि डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार न पड़े।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
