कोलकाता, 29 जनवरी (हि. स.)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले के सिंगूर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की जनसभा में स्कूली छात्रों और स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों की जबरन मौजूदगी का मुद्दा उठाया है। यह रैली बुधवार दोपहर आयोजित की गई थी।

भाजपा के आईटी सेल प्रमुख और पश्चिम बंगाल के केंद्रीय पर्यवेक्षक अमित मालवीय तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इस मामले को लेकर गुरुवार को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए।

अमित मालवीय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल ‘एक्स’ पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि सिंगूर रैली में स्कूली छात्रों को लाया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षकों के जरिए छात्रों को जनसभा में शामिल होने का निर्देश दिया गया।
मालवीय ने कहा कि सिंगूर में हताशा साफ दिख रही है। स्कूली छात्रों ने बताया कि उन्हें शिक्षकों ने ममता बनर्जी की रैली में जाने को कहा। यह जनसमर्थन नहीं, बल्कि राजनीतिक दिखावे के लिए बच्चों और स्कूलों का दुरुपयोग है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई अभिभावक जब अपने बच्चों को स्कूल से लेने पहुंचे, तो उन्हें बच्चे स्कूल में नहीं मिले। मालवीय के अनुसार, “बच्चों को मुख्यमंत्री की रैली में भेज दिया गया। राजनीतिक रैलियों में बच्चों का इस्तेमाल शर्मनाक और अस्वीकार्य है।”
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पहले आईसीडीएस कर्मियों और तिपहिया चालकों पर दबाव डालकर रैलियों में लाया जाता था और उन्हें कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करने की धमकी दी जाती थी, लेकिन जब यह तरीका काम नहीं आया तो अब दबाव स्कूल शिक्षकों पर डाला जा रहा है।
मालवीय का दावा है कि वर्तमान तृणमूल कांग्रेस शासन में कक्षाओं को “राजनीतिक आपूर्ति श्रृंखला” में बदल दिया गया है, जिससे सरकारी स्कूलों पर अभिभावकों का भरोसा लगातार कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसका खामियाजा शिक्षा व्यवस्था और बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
इससे पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने भी सोशल मीडिया पर एक ऑडियो क्लिप साझा की थी।
भाजपा का दावा है कि इस क्लिप में तृणमूल कांग्रेस की एक स्थानीय महिला नेता और स्वयं सहायता समूह की सदस्य के बीच बातचीत है, जिसमें रैली में शामिल न होने पर विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ रोकने की धमकी दी गई है।
हालांकि, इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
