नई दिल्ली, 29 जनवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों मनाली, शिमला और धर्मशाला में बढ़ते पर्यटन से पर्यावरण पर पड़ रहे असर तथा भविष्य की तैयारियों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में स्थिति स्पष्ट की है।

राज्यसभा सांसद और भाजपा के प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार के सवालों के जवाब में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने प्रश्नकाल में कहा कि पर्यटन का विकास और संवर्धन मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों की जिम्मेदारी है, लेकिन केंद्र सरकार योजनाओं के जरिए उन्हें लगातार सहयोग प्रदान कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय ने स्थायी और जिम्मेदार पर्यटन स्थलों के विकास के उद्देश्य से स्वदेश दर्शन योजना को नया रूप देते हुए स्वदेश दर्शन 2.0 शुरू की है। इस योजना के दिशा-निर्देशों में स्थानीय और जिम्मेदार पर्यटन के विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत राज्य सरकारों को पर्यटन परियोजनाएं तैयार करते समय स्थानीय समुदायों और अन्य हितधारकों से परामर्श करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने कहा कि लोकप्रिय पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ को कम करने के लिए वैकल्पिक और नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।
डॉ. सिकंदर कुमार ने सांस्कृतिक पर्यटन और आध्यात्मिक परिपथों के वैश्विक स्तर पर प्रचार से जुड़े सवाल भी उठाए थे। इस पर गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय भारत को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजार में एक मजबूत गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसके तहत यात्रा मेलों और प्रदर्शनियों में भागीदारी, रोड शो, इंडिया इवनिंग, सेमिनार, टूर ऑपरेटरों को प्रचार सामग्री की सहायता, वैश्विक मीडिया अभियान और एयरलाइंस तथा टूर ऑपरेटरों के साथ संयुक्त प्रचार जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों से हिमाचल प्रदेश के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन स्थलों को भी लाभ मिल रहा है।
आपदा तैयारी और मजबूत पर्यटन अवसंरचना के सवाल पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि स्वदेश दर्शन 2.0 की परियोजनाओं में आपदा-रोधी विशेषताओं को भी शामिल किया गया है। इनमें बेहतर सड़क पहुंच, जल निकासी प्रणाली, मार्ग में आपातकालीन सुविधाएं, सूचना और दिशा बताने वाले संकेतक, संचार सुविधाओं में सुधार, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, सीसीटीवी, अंतिम स्थान तक सड़क संपर्क, हेलिपैड और सुरक्षा से जुड़ी अन्य व्यवस्थाएं शामिल हैं। यह व्यवस्थाएं हिमाचल जैसे पहाड़ी और आपदा-संवेदनशील राज्यों के लिए खास तौर पर उपयोगी हैं।
डिजिटल अवसंरचना को लेकर गजेन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय ने इनक्रेडिबल इंडिया डिजिटल प्लेटफॉर्म का नया संस्करण शुरू किया है। यह प्लेटफॉर्म एक एआई आधारित टूल का उपयोग करता है, जो यात्रियों को वास्तविक समय में मौसम की जानकारी, शहरों से जुड़ी जानकारी और जरूरी यात्रा सेवाएं उपलब्ध कराता है। इसके जरिए उड़ानें, होटल, कैब, बसें और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के स्मारकों के टिकट भी आसानी से बुक किए जा सकते हैं। इससे हिमाचल प्रदेश के उभरते पर्यटन स्थलों को डिजिटल रूप से मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
