वाराणसी, 01 फरवरी (हि. स.)। वाराणसी में ताज गंगेज होटल में आयोजित काशी साहित्य कला उत्सव के चौथे संस्करण के तीसरे दिन रविवार काे साहित्य प्रेमियों को इतिहास, रहस्य और शोध की गहराइयों से रूबरू होने का अवसर मिला। चर्चित लेखक डेन मॉरिश ने अपने संवाद सत्र में उनकी चर्चित कृति “द पॉइज़नर ऑफ़ बंगाल” पर विस्तृत चर्चा किया। पुस्तक की पृष्ठभूमि, शोध प्रक्रिया और औपनिवेशिक भारत के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डाला गया।

लेखक डेन ने बताया कि यह उपन्यास दो भाइयों की कहानी पर आधारित है। बड़ा भाई रेलवे स्टेशन पर प्लेग वायरस से संक्रमित कर छोटे भाई की हत्या कर देता है। कथा उस दौर की भयावह सामाजिक और स्वास्थ्य परिस्थितियों को सामने लाती है, जब महामारी और प्रशासनिक अव्यवस्था ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया था। बंगाल को कथा-स्थल के रूप में चुनने पर डेन मॉरिश ने कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान बंगाल प्रशासनिक और सामाजिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था। वहाँ के ऐतिहासिक अभिलेखों और वास्तविक घटनाओं ने कहानी को प्रामाणिक आधार दिया। उनका उद्देश्य इतिहास को नए दृष्टिकोण और गहन शोध के साथ प्रस्तुत करना था।

भारत में वैक्सीन विकास पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय संसाधनों की कमी और आंतरिक चुनौतियों के कारण स्वास्थ्य ढांचे का विकास सीमित था। युवा लेखकों को सलाह देते हुए डेन मॉरिश ने पारंपरिक और विश्वसनीय स्रोतों से शोध करने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि अपने शोध में उन्होंने गृह मंत्रालय की फाइलें, पुलिस रिकॉर्ड, क्षेत्रीय समाचार पत्रों और स्थानीय लोगों से बातचीत का सहारा लिया। सत्र के दौरान लेखक ने पुस्तक के कुछ अंश पढ़कर श्रोताओं को कथा की संवेदनशीलता से भी परिचित कराया।
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हिन्दुस्थान समाचार / शरद
