अर्थशास्त्रियों की नजर में केन्द्रीय बजट और उनकी प्रतिक्रियावाराणसी,01 फरवरी (हि.स.)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 पर देशभर के अर्थशास्त्रियों की गहन प्रतिक्रिया सामने आ रही है। वाराणसी स्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के अर्थशास्त्र विभाग के प्रोफेसर राकेश कुमार तिवारी ने इस बजट को नीति-आधारित, विकासोन्मुख और दीर्घकालिक दृष्टि से सशक्त बताया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 भारत की आर्थिक नीतियों में निरंतरता के साथ-साथ संरचनात्मक सुधार और दीर्घकालिक विकास दृष्टि को स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करता है। यह बजट केवल तात्कालिक राहत या लोक लुभावन घोषणाओं तक सीमित न होकर निवेश, उत्पादकता और संस्थागत मजबूती पर केंद्रित दिखाई देता है। समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अनेक ऐसे कदम उठाए हैं, जो अर्थव्यवस्था को दीर्घकाल में सुदृढ़ बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस बजट की सबसे प्रमुख विशेषता पूंजीगत व्यय पर दिया गया विशेष बल है। वित्त वर्ष 2026–27 के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर लगभग 12.2 लाख करोड़ रूपये किया गया है। आर्थिक सिद्धांतों के अनुसार, पूंजीगत व्यय का गुणक प्रभाव अधिक होता है, जिससे रोजगार सृजन, समग्र मांग और उत्पादन में वृद्धि होती है। बुनियादी ढांचे में निवेश से निजी निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना रहती है, जो आर्थिक वृद्धि को गति देता है। प्रो. तिवारी ने कहा कि सरकार ने विकास के साथ-साथ राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है। राजकोषीय घाटे को मध्यम अवधि में नियंत्रित करने का लक्ष्य यह संकेत देता है कि सरकार ऋण-सततता और मैक्रो-आर्थिक स्थिरता को लेकर सजग है। यह दृष्टिकोण घरेलू और विदेशी निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र को इस बजट में अर्थव्यवस्था का प्रमुख इंजन माना गया है। सेमीकंडक्टर, उच्च-प्रौद्योगिकी उद्योगों और एमएसएमई क्षेत्र के लिए वित्तीय सहायता और संस्थागत समर्थन बढ़ाने की घोषणा की गई है। एमएसएमई क्षेत्र, जो देश की जीडीपी और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देता है, उसके सशक्तिकरण से रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास बजट का एक मजबूत स्तंभ बने हुए हैं। प्रो.तिवारी ने कहा कि बजट में किसान ऋण, ग्रामीण अवसंरचना और रोजगार योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण मांग को बनाए रखने का प्रयास किया गया है। चूँकि भारत की बड़ी आबादी ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए यह दृष्टिकोण समावेशी विकास के लिए अनिवार्य है।

इस आम बजट में स्वास्थ्य और शिक्षा को दीर्घकालिक विकास की आधारशिला के रूप में देखा गया है। स्वास्थ्य अवसंरचना, चिकित्सा शिक्षा और कौशल विकास पर निवेश से मानव पूंजी की गुणवत्ता में सुधार की अपेक्षा है, जो किसी भी अर्थव्यवस्था की स्थायी प्रगति के लिए आवश्यक शर्त है। इसके अतिरिक्त, हरित प्रौद्योगिकी, कार्बन कैप्चर (सीसीयूएस), डिजिटल रचनात्मक अर्थव्यवस्था, महिला उद्यमिता और हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी पहलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर नीतियां बना रही है। कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026–27 को लोकलुभावन के बजाय नीति-आधारित और विकासोन्मुख बजट कहा जा सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि घोषित योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी प्रभावशीलता और पारदर्शिता से किया जाता है। यदि ऐसा होता है, तो यह बजट भारत को एक आत्मनिर्भर, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
