हरिद्वार, 01 फ़रवरी (हि.स.)। एसएमजेएन पीजी कालेज के प्राचार्य व वाणिज्य शास्त्री प्रो. सुनील बत्रा ने वर्ष 2026-27 के बजट को लोक कल्याण और आधुनिकता का संतुलित महासेतु बताया।

केंद्र सरकार के बजट पर प्रतिक्रिया पर प्राे बत्रा ने कहाकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के प्रस्तुत बजट 2026-27 केवल वित्तीय लेन-देन का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत की आकांक्षाओं और वैश्विक चुनौतियों के बीच एक सशक्त आर्थिक कवच है। इस बजट में भविष्य के भारत की तीन स्पष्ट धाराएं दिखाई देती हैं। शैक्षिक क्रांति, सामाजिक सुरक्षा और ढांचागत सुदृढ़ीकरण।

शिक्षा सुधार मात्र साक्षरता नहीं, नवाचार पर जोर
बजट में 50,000 नई अटल टिंकरिंग लैब्स की घोषणा यह दर्शाती है कि सरकार अब केवल डिग्री देने वाली शिक्षा के बजाय स्किल-आधारित और रिसर्च-ओरिएंटेड शिक्षा की ओर बढ़ रही है। 10,000 नई मेडिकल सीटों का सृजन स्वास्थ्य शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कदम न केवल प्रतिभा पलायन को रोकेगा, बल्कि मध्यम वर्ग के युवाओं के लिए डॉक्टर बनने के सपने को वहनीय बनाएगा।
मध्यम वर्ग और सामाजिक न्याय
इस बजट ने मध्यम वर्ग को वह ऑक्सीजन दी है, जिसकी उसे लंबे समय से प्रतीक्षा थी। नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय को प्रभावी रूप से कर-मुक्त करना उपभोग को बढ़ावा देने वाला कदम है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए टैक्स कटौती की सीमा को दोगुना करना और गंभीर बीमारियों की 36 दवाइयों को सीमा शुल्क से मुक्त करना यह सिद्ध करता है कि सरकार वेलफेयर स्टेट की अपनी भूमिका को बखूबी समझती है।
कुंभ प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर का अंतर्संबंध
एक ऐसे देश में जहां कुंभ जैसे विशाल मानवीय समागम होते हैं, वहाँ लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी सबसे महत्वपूर्ण होती है। बजट में प्रस्तावित 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 20 राष्ट्रीय जलमार्गों का विकास कुंभ जैसे आयोजनों के प्रबंधन को वैश्विक स्तर की सुगमता प्रदान करेगा। यह बुनियादी ढांचा न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगा, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ेगा।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम की संजीवनी
10,000 करोड़ रुपये का डैड ग्रोथ फंड छोटे उद्यमियों के लिए सुरक्षा चक्र का काम करेगा। यह रोजगार सृजन की उस रीढ़ को मजबूत करेगा जो कोविड के बाद के झटकों से उभर रही है।
कहाकि निश्चित रूप से, बजट में राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखते हुए विकास की गति को बनाए रखना एक कठिन चुनौती थी, जिसमें वित्त मंत्री काफी हद तक सफल रही हैं। हालांकि, इसकी पूर्ण सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिजिटल एग्री-स्टैक और सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का लाभ ग्रामीण अंचलों तक कितनी तेजी से पहुँचता है।
यह बजट ज्ञान, विज्ञान और जन-कल्याण का एक उत्कृष्ट दस्तावेज है, जो भारत को 2047 के संकल्पों की ओर मजबूती से ले जाने का सामर्थ्य रखता है।
समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा ने बट को लोक कल्याणकारी और विकासपरक बताते हुए कहाकि यह बजट विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
पूर्व विधायक संजय गुप्ता ने केन्द्रीय बजट को गरीब व मध्यम वर्ग के लिए हितकारी बताते हुए कहाकि कैंसर जैसी गंभीर बिमारियों पर दवा शुल्क में कटौती बड़ा कदम है। साथ ही आयकर की सीमा को बढ़ाने से भी मण्यम वर्ग को इसका लाभ मिलेगा।
स्वामी कृष्णानंद गिरि महाराज ने बजट को सभी वर्गों के लिए उचित बताते हुए कहाकि इस बजट से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि सभी के उत्थान पर जोर दिया गया है। जिस कारण से यह बजट कल्याणकारी साबित होगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ.रजनीकांत शुक्ला
