बरेली, 1 फरवरी (हि.स.) । केंद्र सरकार के आम बजट में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं। वित्त मंत्री ने एमएसएमई सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जिससे बरेली जिले की करीब चार हजार औद्योगिक इकाइयों और इनमें कार्यरत 50 हजार से अधिक श्रमिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय उत्पादों के विपणन और व्यापारियों की लंबित मांगों पर बजट खामोश रहा, जिससे उद्यमियों और युवाओं में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली।

आम बजट में छोटे कारोबारियों को सस्ता ऋण उपलब्ध कराने, छोटे लोन पर सरकारी गारंटी देने और छोटी कंपनियों से सीधे सरकारी खरीद की घोषणा की गई है। इसके साथ ही महात्मा गांधी हैंडलूम योजना और पांच लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर जोर दिया गया है। उद्यमियों का मानना है कि इन घोषणाओं से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और एमएसएमई सेक्टर को गति मिलेगी।

बरेली जिले में जरी-जरदोजी, बांस-बेत और लकड़ी के फर्नीचर का बड़ा कारोबार है। जरी उद्योग का वार्षिक टर्नओवर करीब 100 करोड़ रुपये है, जबकि बांस-बेत का कारोबार 10 करोड़ और लकड़ी के फर्नीचर का टर्नओवर लगभग 100 करोड़ रुपये का है। यहां निर्मित उत्पाद देश के कई राज्यों में भेजे जाते हैं और जिले की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं।
जरी और बांस-बेत उद्योग एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल हैं, लेकिन उद्यमियों का कहना है कि इन उत्पादों के लिए अब तक कोई स्थायी बिक्री केंद्र नहीं बनाया गया है। कारोबारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जिले में एक ऐसा कॉमन मार्केट विकसित किया जाए, जहां एक ही छत के नीचे ओडीओपी उत्पादों की बिक्री हो सके। बजट में इस दिशा में कोई घोषणा न होने से उद्यमी निराश नजर आए।
नवाबगंज के भाजपा विधायक डॉ. एमपी आर्य ने कहा कि केंद्रीय बजट देश के समग्र विकास को गति देगा और आत्मनिर्भर भारत को मजबूती प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन पर विशेष ध्यान दिया गया है। भाजपा जिला इकाई की ओर से अशरफी बैंक्वेट हॉल में बजट के लाइव प्रसारण की व्यवस्था की गई, जहां बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भाजपा जिलाध्यक्ष सोमपाल शर्मा ने बजट को दूरदर्शी और संतुलित बताया।
आंवला से सपा सांसद नीरज मौर्य ने बजट को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य के किसानों, मजदूरों और गरीबों के लिए बजट में कोई ठोस योजना नहीं लाई गई। उनका कहना है कि आम जनता को बजट से राहत नहीं मिली है और शेयर व कमोडिटी बाजारों में गिरावट इसका संकेत है।
चिकित्सकों ने कैंसर और डायबिटीज की दवाओं के दाम घटाने के फैसले का स्वागत किया। आयुष रिसर्च एंड डेवलपमेंट और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम्स की घोषणा को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सकारात्मक कदम बताया गया। आईएमए के साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. सुदीप सरन ने कहा कि महंगे इलाज से जूझ रहे मरीजों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।
युवाओं ने स्टार्टअप और सस्ती शिक्षा को लेकर बजट में ठोस पहल न होने पर निराशा जताई। वहीं एनएसएस वॉलंटियर मुस्कान यादव ने नारी सशक्तिकरण के लिए शी-मार्ट और छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण की योजनाओं को सराहनीय बताया। सीए अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि यह बजट पिछले वर्ष के बजट का बूस्टर है और दीर्घकालीन दृष्टि से संतुलित है। हालांकि, स्थानीय उद्योगों के लिए बाजार, व्यापारियों और युवाओं की कुछ प्रमुख अपेक्षाएं अब भी अधूरी रह गई हैं, जिससे बजट को लेकर जिले में मिली-जुली प्रतिक्रिया बनी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार
