खटीमा, 01 फ़रवरी (हि.स.)। भारतीय सेना की 6 कुमाऊं रेजिमेंट जो जंगी पलटन के नाम से मशहूर है, 86वें स्थापना दिवस पर शौर्य, बलिदान और यादों का संगम दिखा। खटीमा में आयोजित कार्यक्रम में 1941 से लेकर 1971 तक की वीर गाथाओं को दोहराया गया व पूर्व सैनिकों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। युद्ध उद्घोष गीतों और कुमाऊंनी लोकधुनों के बीच स्थापना दिवस को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

निजी होटल सभागार में हुए इस कार्यक्रम में पूर्व सैनिक संगठन खटीमा के अध्यक्ष कैप्टन गंभीर सिंह धामी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने 6 कुमाऊं रेजिमेंट के शौर्य और अनुशासन को याद करते हुए शहीद जवानों को नमन किया। यहां विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे पूर्व सैनिकों ने युद्ध उद्घोष गीत गाए। साथ ही पुराने युद्ध अनुभव और साथी सैनिकों की यादें भी साझा की गईं। इसके अलावा ‘बेडू पाको बारह मासा’ सहित कई कुमाऊंनी गीतों पर पूर्व सैनिक जमकर झूमे।

इस दौरान रिटायर्ड कैप्टन पुष्कर सिंह सामंत ने अपने व्याख्यान में बताया कि 1 फरवरी 1941 को गठित 6 कुमाऊं रेजिमेंट ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में देश की रक्षा में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया।
कैप्टन सामंत ने बताया कि 6 कुमाऊं रेजिमेंट ने अपने शौर्य के बल पर महावीर चक्र, वीर चक्र, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र सहित कई सेना मेडल हासिल किए हैं। यह रेजिमेंट आज भी भारतीय सेना की सबसे अनुशासित और बहादुर इकाइयों में गिनी जाती है।
हिन्दुस्थान समाचार / डी तिवारी
