धर्मशाला, 01 फ़रवरी (हि.स.)।नगर निगम धर्मशाला के पूर्व महापौर देवेन्द्र जग्गी ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट को फीका, दिशाहीन और निराशाजनक करार देते हुए कहा कि यह बजट न तो आम जनता की अपेक्षाओं को पूरा करता है और न ही छोटे व पहाड़ी राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखता है।

देवेन्द्र जग्गी ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट भाषण में पारदर्शिता का अभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला। बजट भाषण में कई प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए किए गए वास्तविक बजटीय आवंटन की स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि सरकार ने विकास के बजाय केवल आंकड़ों का खेल खेला है।

रविवार को जारी एक प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि भले ही बजट दस्तावेज़ों का विस्तृत अध्ययन अभी शेष है, लेकिन बजट भाषण के बाद ही यह स्पष्ट हो गया है कि जिन उम्मीदों के साथ देश और प्रदेश की जनता इस बजट की ओर देख रही थी, वे पूरी तरह से टूट गई हैं। यह बजट नीतिगत स्पष्टता और ठोस दिशा देने में असफल रहा है।
पूर्व महापौर ने चिंता जताते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित छोटे राज्यों को आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) न देने के चलते हिमाचल प्रदेश को आगामी वर्षों में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ेगा। इस अनुदान के समाप्त होने से न केवल हिमाचल बल्कि अन्य छोटे राज्यों के सामने भी गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
