मंडी, 01 फ़रवरी (हि.स.)। बागर साहित्य परिषद की मशहूर पत्रिका बागर के संपादक एवं वरिष्ठ साहित्यकार प्रकाशचंद्र धीमान लोकसंस्कृति पर आधारित पुस्तक हिमाचल की लोक गाथाएं: झेड़े का पुस्तक विमोचन समारोह एवं बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन मंडी के विश्वकर्मा हाल में किया गया। इस अवसर पर बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी ने बतौर मुख्यअतिथि शिरकत की। वहीं पर प्रथम सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश कपूर ने की।

इस अवसर पर प्रकाश चंद्र धीमान ने कहा कि उनके द्वारा इन लोकगाथों का संकलन भाषा एवं संस्कृति विभाग की सर्वेक्षण योजना के दौरान किया गया था। जिसका हाल ही में पुस्तक रूप में प्रकाशन किया गया। इस अवसर पर विधायक इंद्र सिंह गांधी ने प्रकाश चंद्र धीमान द्वारा लिखित हिमाचल की लोक गाथाएं :झेड़े पुस्तक का लोकार्पण किया। अपने संबोधन में विधायक इंद्र सिंह गांधी ने कहा कि कविता वह दीप है, जो अंधकार में भी प्रकाश देता है, वह स्वर है, जो मौन समाज को आवाज़ देता है, और वह शक्ति है, जो टूटे हुए मनोबल को जोड़ने का काम करती है।

उन्होंने कहा कि भारत की धरती सदा से संत-कवियों की भूमि रही है। यही वह भूमि है जहां कबीर ने समाज को आईना दिखाया, तुलसी ने मर्यादा सिखाई, सूर ने भक्ति का मार्ग दिखाया, रहीम ने मानवता का पाठ पढ़ाया, दिनकर ने राष्ट्र को स्वाभिमान दिया, और अटल बिहारी वाजपेयी ने कविता को राजनीति से जोड्कर संवेदनशील नेतृत्व की परपरा स्थापित की। उन्होंने कहा कि कवि समाज का पहरी होता है जो अन्याय के विरुद्ध शब्द खड़े करता है, वह पीड़ा को स्वर देता है, वह सत्य साहस देता है, और वह आशा को आकार देता है। आज का युग भौतिक विकास का युग है, तकनीक का युग है, लेकिन अगर इस विकास में संवेदना नहीं होगी, तो यह विकास अधूरा रहेगा। अगर इस प्रगति में संस्कार नहीं होगे, तो यह प्रगति दिशाहीन जाएगी। यही कारण है कि साहित्य और कविता आज पहले से कही अधिक आवश्यक एवं प्रासंगिक हो गए हैं। इस अवसर पर उन्होंने बागर साहित्य परिषद को अपनी ऐच्छिक निधि से पचास हजार रूपए देने की घोषणा की। समारोह के दूसरे सत्र में राज्यस्तरीय बहुभाषी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता डा. पीसी कौंडल ने की। इ
स अवसर पर मंडी, बिलासपुर, शिमला, कांगड़ा और चंबा आदि जिलों से आए कवियों ने हिंदी और पहाड़ी में कविताएं सुनाई। इस अवसर पर मंच का संचालन कवयित्री प्रियंवदा ने किया। जबकि जगदीश कपूर, विनोद गुलेरिया, अनिल शर्मा नील, अशोक दर्द, रवींद्र शर्मा, प्रतिभा शर्मा, किरण गुलेरिया, रत्तन लाल शर्मा, पीसी कौंडल, सरिता हांडा, विद्या शर्मा, कृष्ण चंद्र महादेविया, उत्तम चंद शर्मा, अर्पणा धीमान, शीतल , लतेश शर्मा, राजेंद्र ठाकुर आदि ने कविताएं सुनाई।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा
