गुरुग्राम, 11 मार्च (हि.स.)। हरियाणा के गुरुग्राम के सेक्टर-10 स्थित नागरिक अस्पताल में संचालित प्राइवेट सीटी स्कैन संस्थान मणिपाल की ओर से एक 11 वर्षीय किशोर की सीटी स्कैन रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। किशोर को टीबी थी, लेकिन रिपोर्ट में सब नॉर्मल लिख दिया गया। डॉक्टर द्वारा टीबी का संदेह जताए जाने पर खुलासा हुआ।स्थानीय निवासी रितुराज ने बताया कि उनके 11 साल के बेटे को पिछले करीब डेढ़ माह से पेट में दर्द हो रहा था। उन्हें पहले प्राइवेट अस्पताल में दिखाया गया था। पेट में दो गांठ का पता चला। सभी टेस्ट किए गए। डॉक्टर ने टीबी होने का संशय जाहिर किया। इसके बाद वे अपने बेटे को सेक्टर-10 नागरिक अस्पताल लेकर गए। वहां पर बच्चों के डॉक्टर से जांच कराई गई। वहां कुछ पता नहीं चला। अल्ट्रासाउंड कराया गया जिसमे पेट में गांठें आई। डॉक्टर ने उन्हें सीटी स्कैन कराने का परामर्श दिया तो उन्होंने अस्पताल में भी सीटी स्कैन करवाया। नौ मार्च 2026 को सीटी स्कैन हुआ था। 10 मार्च को तीन बजे रिपोर्ट देने की बात कही गई। साथ ही कहा गया कि वाट्सऐप पर भी रिपोर्ट भेज देंगें। जब रिपोर्ट के लिए फोन किया गया तो किसी ने कॉल रिसीव नहीं की। ऋतुराज ने बताया कि मंगलवार की रात को नौ बजे उन्हें वाट्सऐप पर रिपोर्ट भेजी गई। बुधवार को ऋतुराज की पत्नी ने नागरिक अस्पताल में डॉक्टर को रिपोर्ट दिखाई तो डॉक्टर ने भी हैरानी जाहिर की। क्योंकि इस रिपोर्ट को नॉर्मल दिखाया गया था, जबकि किशोर के पेट में गांठें थीं।इस पर वे जब सीटी स्कैन विभाग में डॉ. सूद से मिलने गए तो उनसे मिलने नहीं दिया गया। स्टाफ को यह जानकारी दी गई तो वहां पर रिपोर्ट का प्रिंट आउट निकालकर उस पर हाथ से टीबी ओर गांठो की रिपोर्ट दी गई। यानी पूरी रिपोर्ट में तो टीबी नहीं लिखी थी, मगर हाथ से टीबी ओर गांठे लिख दी गई। ऋतुराज ने सीटी स्कैन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह तो घोर लापरवाही है। उनकी रिपोर्ट बनाने के लिए सीटी स्कैन की फिल्म तक नहीं देखी गई, क्योंकि वह फिल्म तो उनके पास ही थी। हवा में ही रिपोर्ट बना दी गई। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार टीबी को खत्म करने के लिए करोड़ों रुपये का बजट खर्च कर रही है, दूसरी तरह यहां सरकारी अस्पताल में स्थापित प्राइवेट लैब में इस तरह का फर्जीवाड़ा हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगर वे इस रिपोर्ट पर ही विश्वास कर लेते तो उनके बेटे की बीमारी बढ़ जाती। पूरा परिवार भी इस बीमारी की चपेट में आ जाता। पीडि़त परिवार ने इसकी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत करके कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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हिन्दुस्थान समाचार / ईश्वर
