जबलपुर, 11 मार्च (हि.स.)। मदन महल पहाड़ी से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बुधवार को भी जारी रही। अभियान के पांचवें दिन भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण कार्रवाई की रफ्तार कुछ धीमी रही, जिसके चलते प्रशासन केवल 17 अतिक्रमण ही हटा सका। लगातार पांच दिनों से चल रहे इस अभियान में श्रमिकों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

प्रशासनिक अमले के अनुसार पहाड़ी के कई हिस्सों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जेसीबी मशीनें नहीं पहुंच पा रही हैं। ऐसे स्थानों पर पक्के मकानों को मैन्युअल तरीके से यानी हाथों से तोड़ा जा रहा है। पक्के निर्माणों को ढहाने में अधिक शारीरिक श्रम लगने के कारण कार्य की गति प्रभावित हो रही है। लगातार कई दिनों से काम कर रहे मजदूर भी इस कठिन परिस्थिति में थके हुए नजर आए।
यह पूरी कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों के पालन में की जा रही है। जिला प्रशासन और नगर निगम की संयुक्त टीम ने मदन महल पहाड़ी क्षेत्र में कुल 715 अतिक्रमणों को चिन्हित किया है, जिन्हें पूरी तरह हटाया जाना है। पांच दिनों की कार्रवाई के बाद अब तक कुल 102 अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं।
प्रशासन का कहना है कि पहाड़ी को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कर उसके मूल स्वरूप में वापस लाने का लक्ष्य रखा गया है। शेष बचे अतिक्रमणों को हटाने के लिए आगामी दिनों में भी तय कार्ययोजना के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। न्यायालय के सख्त रुख के कारण प्रशासनिक अमला किसी भी प्रकार की ढील देने के मूड में नहीं है।
बताया गया है कि शुरुआत में पहाड़ी पर कच्चे निर्माण और झोपड़ियां बनाई गई थीं, लेकिन समय के साथ कई लोगों ने इन्हें पक्के मकानों का रूप दे दिया। अधिकारियों के मुताबिक करीब 20 प्रतिशत अतिक्रमणकारियों ने सीमेंट-कंक्रीट के मजबूत मकान बना लिए थे। कुछ स्थानों पर मकानों के सामने आंगन और बगीचे भी विकसित कर लिए गए थे, जिन्हें भी कार्रवाई के दौरान हटाया जा रहा है।
अवैध बस्ती में शहरी क्षेत्रों जैसी सुविधाएं भी मौजूद थीं। पहाड़ी के भीतर तक पक्की सड़कों का जाल बिछा हुआ था, जबकि सरकारी नलों के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति और घरों में बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध थे। प्रशासन अब इन सभी अवैध निर्माणों को चरणबद्ध तरीके से हटाकर पहाड़ी के प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित करने की दिशा में कार्रवाई कर रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक
