धर्मशाला, 12 मार्च (हि.स.)। तिब्बती महिला संघ (सेंट्रल) ने 67वें तिब्बती महिला विद्रोह दिवस के अवसर पर वीरवार को मैक्लोडगंज के चुगलाखांग मठ के प्रांगण में चीन सरकार के खिलाफ रोष रैली प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में विभिन्न क्षेत्रों से आई तिब्बती स्कूली छात्राओं और महिलाओं ने तिब्बत की आजादी और तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति को लेकर चीन के खिलाफ़ नारेबाजी भी की। हाथों में तिब्बती झंडा उठाये नारी शक्ति ने चीन सरकार के रवैये के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

वहीं इस दौरान प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को सम्बोधित करते हुए तिब्बती महिला संघ के पदाधिकारियों ने तिब्बत में मानवाधिकारों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संगठन ने कहा कि 12 मार्च 1959 को हजारों तिब्बती महिलाओं ने चीन के कब्जे के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह कर तिब्बत की स्वतंत्रता और पहचान की रक्षा के लिए साहसिक संघर्ष किया था।
उन्होंने कहा कि 12 मार्च 1959 को जब चीन की सरकार ने तिब्बत पर अवैध कब्जा कर लिया और तिब्बती राष्ट्र को विनाश के कगार पर ला दिया, तब तिब्बत की तीनों प्रांतों की महिलाओं ने असाधारण साहस का परिचय दिया। बिना किसी हथियार और पुरुषों के सहयोग के हजारों तिब्बती महिलाएं ल्हासा के नॉरबुलिंगका और पोटाला पैलेस के पास एकत्रित हुईं और चीन के अवैध अधिग्रहण के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन शुरू किया।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक घटना को 67 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन यह दिन हर तिब्बती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। तिब्बत के अंदर और निर्वासन में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोग इस दिन को हर वर्ष स्मरण करते हैं। 1959 के विद्रोह की पहली वर्षगांठ निर्वासन में कालिम्पोंग, दार्जिलिंग और गंगटोक में मनाई गई थी।
संघ ने आरोप लगाया कि तिब्बत पर कब्जे के बाद से चीन की सरकार तिब्बती लोगों की संस्कृति, भाषा, धर्म और पर्यावरण को व्यवस्थित रूप से नष्ट करने की नीतियां लागू कर रही है। तिब्बती गायकों, लेखकों, पर्यावरण कार्यकर्ताओं, धार्मिक नेताओं और भाषा के संरक्षकों को मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया जा रहा है।
संगठन ने यह भी दावा किया कि चीन की नीतियों के कारण अब तक दस लाख से अधिक तिब्बती मारे जा चुके हैं और कई लोग जबरन लापता हो गए हैं। विरोध के रूप में 169 तिब्बती पुरुषों और महिलाओं ने आत्मदाह किया है।
तिब्बती महिला संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे तिब्बत के लोगों के अधिकारों की रक्षा और वहां हो रहे दमन को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाने का भी आग्रह किया।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
