आसनसोल, 12 मार्च (हि. स.)। सेल आइएसपी में नॉन वर्क्स एंड वर्क्स डिपार्टमेंट के साथ कार्यपालक और गैर कार्यपालक (नॉन एग्जीक्यूटिव) के छुट्टी के अंतर (लीव डिसपैरिटी) को लेकर उप क्षेत्रीय श्रमायुक्त (केंद्रीय) केसी साहू ने गुरुवार को सेल आईएसपी अधिकारियों तथा बीएमएस पदाधिकारियों के साथ बैठक किया।

बैठक में आइएसपी प्रबंधन की ओर से रजत सरकार प्रदीप बनर्जी, बलराम कुमार, शुभम पटेल, बीएमएस संजीत बनर्जी, महेश बनर्जी, श्रीकांत साह, रणधीर गुप्ता, उपस्थित थे।
बताया गया कि बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ द्वारा मैनेजमेंट के सेफ्टी सर्कुलर (स्पीड वायलेशन पेनल्टी) के खिलाफ 20 फरवरी को डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर (सेंट्रल) के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी। यूनियन से बिना परामर्श के कर्मचारियों पर मौद्रिक दंड (मॉनेटरी पेनल्टी) लागू किया गया। इस मामले को डिप्टी चीफ लेबर कमिश्नर (सेंट्रल), आसनसोल ने गंभीरता से लिया है और डीआइसी सेल इस्को स्टील प्लांट, बर्नपुर से सात दिनों के अंदर जवाब मांगा गया है।
कर्मचारियों के अधिकारों और एस्टैब्लिश्ड इंडस्ट्रियल रिलेशंस प्रैक्टिस की रक्षा के लिए बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ लगातार संघर्ष कर रहा है। बर्नपुर इस्पात कर्मचारी संघ (बीएमएस) की ओर से छुट्टी के मामले पर हुई सुनवाई के दौरान यूनियन ने यह आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था संविधान के सिद्धांतों तथा फैक्ट्रीज एक्ट 1948 की भावना के विरुद्ध है।
प्रबंधन के प्रावधानों ने अपने पक्ष में कहा कि कार्यपालक और गैर कार्यपालक कर्मचारियों के बीच छुट्टी में जो अंतर है, वह इसलिए है क्योंकि दोनों अलग-अलग नियमों से संचालित होते हैं।
गैर कार्यपालक कर्मचारियों के लिए स्टैंडिंग ऑर्डर लागू है, जबकि कार्यपालकों के लिए सीडीएस रूल्स लागू होते हैं। इसलिए दोनों की सेवा संबंधी उनके-अपने नियमों के अनुसार भिन्न हैं। यूनियन की ओर से यह तर्क रखा गया कि जब कार्यपालक और गैर कार्यपालकों को समान प्रकार की छुट्टी की सुविधा उपलब्ध है, तो वही व्यवस्था गैर कार्यपालक के लिए क्यों लागू नहीं की जा सकती।इनके बीच छुट्टी के विषय में प्रबंधन ने यह कहा कि वर्तमान छुट्टी के नियम लंबे समय से प्रचलित हैं, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर उनकी समीक्षा की जा सकती है।
सभी पक्षों की बात सुनने के बाद डिप्टी सीएलसी ने निष्कर्ष देते हुए कहा कि प्रबंधन को यूनियन के साथ संवाद कर उचित समय सीमा के भीतर छुट्टी असमानता को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं होगा, तो किसी भी पक्ष के अनुरोध पर अथवा परिस्थितियों के अनुसार डिप्टी सीएलसी द्वारा आगे आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है। बीएमएस इस मामले का सकारात्मक रूप से निरंतर अनुशरण करेगी ताकि शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष विश्वकर्मा
