यमुनानगर, 13 मार्च (हि.स.)। यमुनानगर के जगाधरी में आबकारी विभाग से जुड़े 90 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट के मामले में कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है। विभाग की शिकायत पर थाना शहर जगाधरी पुलिस ने एक फर्म के प्रोपराइटर के खिलाफ केस दर्ज किया है, जबकि बैंक के संबंधित कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई गई है। आबकारी निरीक्षक मोहन सिंह राणा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मैसर्स एस.एम. वाइन के एल-1 लाइसेंस से जुड़े एक ब्रीच मामले को सात नवंबर 2023 को कलेक्टर (आबकारी) हरियाणा को भेजा गया था। इसके बाद फर्म की ओर से अतिरिक्त आबकारी ड्यूटी, परमिट फीस और स्टॉक में अंतर की राशि के रूप में 90 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट आठ नवंबर 2023 को विभाग में जमा कराया गया।

मामले की सुनवाई के बाद कलेक्टर (आबकारी) ने 20 नवंबर 2023 को फर्म पर 2 करोड़ 55 लाख 16 हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए एल-1 लाइसेंस रद्द करने के आदेश जारी किए। इसके खिलाफ फर्म मालिक ने अदालत में याचिका दायर की, जिस पर एक दिसंबर 2023 को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए। बाद में चार मार्च 2024 को अदालत ने इस आदेश को आगे भी जारी रखा। शिकायत के अनुसार विभागीय रिकॉर्ड में यह दर्ज किया गया कि 90 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट दो दिसंबर 2023 को जीआरएन के माध्यम से भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की जगाधरी शाखा में सरकारी खाते में जमा कराया गया था। हालांकि बाद में विभागीय जांच के दौरान यह सामने आया कि उक्त राशि वास्तव में सरकारी खजाने में जमा नहीं हुई।
जांच के लिए उप आबकारी एवं कराधान अधिकारी ने एक समिति का गठन किया। समिति द्वारा बैंक से प्राप्त जानकारी में बताया गया कि चालान में कथित त्रुटि सुधार के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट खरीदार को वापस कर दिया गया था। शिकायत में फर्म के प्रोपराइटर कपिल और बैंक कर्मचारियों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार
