बलिया, 13 मार्च (हि.स.)। शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए राज्यपाल पुरस्कार प्राप्त शिक्षक सर्वचन्द्र राय सेवानिवृत्त होने के बाद अपनी पेंशन की एक बड़ी धनराशि समाज के सबसे लाचार व्यक्तियों यानी अंधे लोगों पर खर्च कर मिसाल पेश कर रहे हैं। खास बात यह है कि हर माह जिन्हे यह राशि मिलती है, उन्हें पता नहीं है कि यह कौन देता है।

जूनियर हाई स्कूल में शिक्षक पद से वर्ष 2013 में सेवानिवृत्त होने के बाद सत्तर साल की अवस्था में उन्हें यह अभाष हुआ कि अपनी आमदनी से ऐसे लोगों की मदद करनी चाहिए जो बिल्कुल असहाय हैं। उनका कहना है कि मैंने परिवार के लिए बहुत किया। आज भी जो मिल रहा है उसका बड़ा हिस्सा परिवार पर ही जा रहा है, लेकिन उसमें से कुछ समाज के सबसे लाचार व्यक्ति को भी देना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आर्थिक सहयोग उसी को करने की कोशिश होती है जिसमें कोई गलत लत न हो। खासकर शराब का सेवन न करता हो। जब उनसे पूछा गया आपके मन में कैसे आया कि अपनी आमदनी में से कुछ हिस्सा समाज के गरीब लाचार व्यक्ति को दिया जाय। इस पर कहा कि समाज का सबसे लाचार व्यक्ति अंधा ही होता है। बताया कि जब एक पुस्तक पढ़ कर मेरे मन ये बात आई। तभी से यह सहयोग निरंतर जारी है। अभी मेरी पेंशन की धनराशि से हर माह 24 अंधे व्यक्तियों को पांच-पांच सौ रूपये भेजा जाता है। मेरे इस प्रयास से उत्साहित होकर कुछ अन्य लोग भी आगे आए हैं। जिनकी मदद से फिलहाल इलाके के कुल 36 अंधे व्यक्तियों को हर माह पांच सौ रूपये भेजे जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / नीतू तिवारी
