आगरमालवा, 13 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के आगरमालवा जिले में परिवार की सुख-समृद्धि, सौभाग्य और गृह दशा में सुधार की कामना से शुक्रवार को चैत्र माह की कृष्ण पक्ष दशमी पर महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक विधि विधान से दशामाता का पूजन कर व्रत रखा तथा पीपल के वृक्ष की परिक्रमा भी की।

इस अवसर पर सुबह से ही शकर कुईया, हनुमानगढ़ी सहित शहर और छावनी क्षैत्रों के विभिन्न स्थानों और मंदिरों में स्थित पीपल, नीम और बरगद के वृक्षों के पास महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं पूजा सामग्री लेकर पहुंचीं और वृक्षों की पूजा कर परिक्रमा लगाई। इस दौरान उन्होंने दशामाता की कथा भी श्रद्धापूर्वक सुनी और अपने परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। यह पर्व धार्मिक आस्था का प्रतीक है, जिसमें महिलाएं अपने घरों की दशा सुधारने की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशामाता को मां पार्वती का ही स्वरूप माना जाता है। दशामाता का पूजन करने से घर की नकारात्मक दशाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख, समृद्धि तथा शांति बनी रहती है। दशामाता पूजन के दिन पीपल, नीम और बरगद जैसे तीन प्रमुख वृक्षों की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इन वृक्षों की पूजा और परिक्रमा करने से घर-परिवार में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का वास होता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रितेश शर्मा
