नैनीताल, 13 मार्च (हि.स.)। एरीज यानी आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान नैनीताल में 9 से 13 मार्च 2026 तक युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को आईएलएमटी से प्राप्त खगोलीय आंकड़ों के उपयोग तथा उनके वैज्ञानिक अध्ययन से परिचित कराने के उद्देश्य से तृतीय अंतर्राष्ट्रीय तरल दर्पण टेलीस्कोप (आईएलएमटी) कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में देश के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों से चयनित 30 से अधिक विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम मुख्य रूप से आईएलएमटी से जुड़े देश-विदेश के वैज्ञानिक अनुसंधान और अवलोकन तकनीकों पर केंद्रित रहा।

बताया गया कि एरीज की देवस्थल वेधशाला में स्थापित चार मीटर व्यास की दूरबीन एक विशेष प्रकार की दूरबीन है, जिसमें घूमते हुए पात्र में पारे का उपयोग कर अवतल दर्पण बनाया जाता है। इस दूरबीन की सहायता से आकाश के एक निश्चित भाग से गुजरने वाले सुपरनोवा, परिवर्तनशील तारों, सक्रिय आकाशगंगाओं तथा अन्य खगोलीय घटनाओं का निरंतर अध्ययन संभव है।
कार्यशाला के दौरान वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को खगोलीय छवियों के प्रसंस्करण, प्रकाश वक्र के अध्ययन तथा समय-आधारित खगोलीय घटनाओं के विश्लेषण की तकनीकों की जानकारी दी। साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक डेटा विश्लेषण विधियों का भी परिचय कराया। एरीज के निदेशक डॉ. मनीष नाजा ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं युवा वैज्ञानिकों को आधुनिक खगोलीय अनुसंधान में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और आईएलएमटी परियोजना के वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देती हैं।
कार्यशाला में बेल्जियम के प्रो. जों सुरदेज के साथ एरीज के वैज्ञानिक डॉ. कुंतल मिश्रा, डॉ. नीलम पवार, डॉ. जीवन पांडेय, डॉ. सुवेंदु रक्षित तथा डॉ. योगेश जोशी सहित वरिष्ठ शोध छात्रों ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी
