प्रयागराज, 16 मार्च (हि.स.)। भारत में डिप्रेशन एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। आज की तेज रफ्तार जीवन शैली में लगातार काम का दबाव एवं असफलता एक गंभीर मानसिक विकार में बदल सकता है। मन का दुखी रहना, थकान, सुस्ती, नींद न आना और खुद को बेकार समझना, मन में आत्महत्या का विचार आना डिप्रेशन के लक्षण हो सकते हैं।

यह बातें सोमवार की सुबह एसकेआर योग एवं रेकी शोध प्रशिक्षण और प्राकृतिक संस्थान प्रयागराज रेकी सेंटर पर स्पर्श चिकित्सक सतीश राय ने लोगों को सम्बोधित करते हुए कही।
–डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण है एकल परिवार
उन्होंने कहा डिप्रेशन के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। डिप्रेशन (अवसाद) का सबसे बड़ा कारण है अकेलापन। भारत में संयुक्त परिवार का तेजी से घटना और एकल परिवार का बढ़ना है। एकल परिवार में स्वतंत्रता ज्यादा होती है और जरा सी परेशानी और असफलता तनाव, दबाव और भविष्य की असुरक्षा डिप्रेशन का कारण बनता है। जबकि संयुक्त परिवार में कई पीढ़ियों के सदस्य एक साथ रहते हैं। जिससे आपस में आर्थिक सुरक्षा भावनात्मक सहयोग से वह सुरक्षित महसूस करता है। इसलिए अकेलापन महसूस नहीं होता। अनुभव के आधार पर लिए गये फैसले से पूरा परिवार खुश रहता है।
–डिप्रेशन का एक कारण असफलता भी
सतीश राय ने कहा एकल परिवार (जिसमें सिर्फ पति-पत्नी और बच्चे हैं) ऑफिस परिवार या व्यवसाय में छोटी-छोटी बात पर नोंक-झोंंक या असफलता व्यक्ति को अलग-थलग महसूस कराता है और यहीं से डिप्रेशन की शुरुआत होती है।
–अदृश्य बीमारी है अकेलापन
सतीश राय ने कहा अकेलापन शरीर के लिए हानिकारक है। यह अदृश्य बीमारी है जो धीरे-धीरे लोगों को बीमार कर रहा है। यह शरीर के लिए हानिकारक है। यह जान का साइलेंट दुश्मन है। रिश्तों की दूरियां अकेलेपन के लिए जिम्मेदार हो रही है। सफलता की लालच एवं एकल परिवार इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है। 90% लोग अकेलापन महसूस करने के कारण डिप्रेशन में चले जाते हैं जो आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है।
–जीवन में रिश्तों को दें महत्व
सतीश राय ने कहा जैसे बीमारी का इलाज कराने अस्पताल जाते हैं, वैसे ही इसका इलाज करना बहुत जरूरी है। इससे बचने के लिए पति-पत्नी बच्चों के साथ अपने अन्य रिश्तों को भी समय दीजिए। अपने दोस्तों को समय दीजिए, स्पर्श ध्यान करिए और प्रसन्न रहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / विद्याकांत मिश्र
