मंडी, 16 मार्च (हि.स.)। मंडी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के महाप्रबंधक को निर्देश दिया है कि वे एक पीड़ित उपभोक्ता को उसकी पसंद का नया मोबाइल नंबर निःशुल्क आवंटित करें और उसे हुई मानसिक प्रताड़ना व कानूनी खर्च के मुआवजे के रूप में 30,000 रुपए का भुगतान करें। यह मामला मंडी के वरिष्ठ अधिवक्ता और महेश चंदर शर्मा से जुड़ा है, जो पिछले 15 वर्षों से मोबाइल नंबर 94187 70007 का उपयोग अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए कर रहे थे। कोविड काल के दौरान उनके गांव में नेटवर्क की समस्या होने के कारण वे समय पर रिचार्ज नहीं करवा पाए, जिसके बाद बीएसएनएल ने बिना किसी पूर्व सूचना या लिखित नोटिस के उनका यह नंबर किसी अन्य व्यक्ति को आवंटित कर दिया। जब शर्मा ने इस संबंध में विभाग से पूछताछ की और आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, तो यह स्वीकार किया गया कि नंबर दोबारा आवंटित करने से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई थी।

उपभोक्ता ने आयोग के समक्ष तर्क दिया कि ट्राई भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के नियमों के अनुसार किसी भी नंबर को निष्क्रिय करने के बाद उपभोक्ता को 15 दिनों का ग्रेस पीरियड दिया जाना अनिवार्य है और इसकी सूचना उपभोक्ता को दी जानी चाहिए ताकि वह नंबर को पुनः सक्रिय करवा सके। दूसरी ओर बीएसएनएल ने दलील दी कि 90 दिनों तक रिचार्ज न होने के कारण नंबर स्वतः ही सिस्टम द्वारा दूसरे उपभोक्ता को आवंटित कर दिया गया। आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि बीएसएनएल ने अनिवार्य नोटिस न देकर सेवा में भारी कोताही बरती है और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश दिया कि चूंकि पुराना नंबर अब किसी और को दिया जा चुका है, इसलिए बीएसएनएल शिकायतकर्ता को उनकी पसंद का नया नंबर प्रदान करे और साथ ही उत्पीड़न के लिए 25,000 रुपए का हर्जाना तथा 5,000 रुपए मुकदमा व्यय के रूप में अदा करे। यह निर्णय उन सभी मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए एक नजीर है जिनके नंबर टेलीकॉम कंपनियां बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए बंद कर देती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / मुरारी शर्मा
