रांची, 16 मार्च (हि.स.)। विधानसभा बजट सत्र के दौरान में अनुदान मांगों की कटौती प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए दूसरी पाली में विधायक जयराम महतो ने झारखंड में जमीन की लूट, सीएनटी-एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर जमीन हड़पने, स्थानीय नियोजन नीति सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया।

उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित कराते हुए
जल, जंगल और जमीन, स्थानीय नीति और विभिन्न समुदायों के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाया।
जयराम महतो ने कहा कि झारखंड के लोगों की आत्मा उनकी जमीन और खेतों में बसती है। लेकिन आज खेती योग्य भूमि पर दलाल हावी हैं। अंग्रेजों के समय आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन की रक्षा के लिए विलकिंसन रूल्स, छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट (सीएनटी), संथाल परगना टेनेंसी एक्ट (एसपीटी) बनाए गए थे। लेकिन आज बड़े पैमाने पर उद्योगपति जमीन माफिया, रैयतों की खेती योग्य जमीन का अधिग्रहण कर रहे हैं।
उन्होंने देवघर एयरपोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि भूमि अधिग्रहण के लिए बने नए कानून के बावजूद किसानों को बाजार दर के अनुसार मुआवजा नहीं मिल रहा है। पुराने फार्मूले के आधार पर भुगतान किया जा रहा है, जिससे किसानों के साथ अन्याय हो रहा है।
विधायक ने कहा कि पिछले एक वर्ष में रांची के आसपास हुई कई हत्याएं जमीन विवाद से जुड़ी थीं। अब यह गांव तक जा पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि अंचल कार्यालयों में तीन लाख से अधिक भूमि विवाद के मामले लंबित हैं। ऑनलाइन रिकॉर्ड में खाता और प्लॉट संख्या में कई त्रुटियां सामने हैं, जिन्हें सुधारने के लिए विशेष शिविर लगाने की जरूरत है।
उन्होंने कुर्मी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने और सूंडी समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग उठाई। साथ ही केवट, मल्लाह और निषाद जातियों को भी अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने की प्रक्रिया तेज करने की बात कही।
इसके अलावा उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए सभी सचिवों और प्रधान सचिवों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि शहरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में खेती योग्य जमीन जिसे किसान सालों से खेती कर रहे हैं वैसी जमीन की रक्षा करना सरकार का दायित्व है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Manoj Kumar
