कोलकाता, 18 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार सूची जारी होने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। मंगलवार रात से ही पूर्व बर्दवान, जलपाईगुड़ी समेत कई जिलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर विरोध की घटनाएं सामने आई हैं।

पूर्व बर्दवान जिले की खंडघोष विधानसभा सीट से नबीना बाग को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के एक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय तृणमूल नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने चेतावनी दी है कि यदि उम्मीदवार नहीं बदला गया तो ब्लॉक अध्यक्ष और कई क्षेत्रीय अध्यक्ष अपने पदों से इस्तीफा दे देंगे और चुनाव प्रचार से दूरी बनाए रखेंगे।
विरोध कर रहे नेताओं का आरोप है कि पार्टी में उन लोगों को महत्व दिया जा रहा है जो संगठन के प्रति वफादार नहीं रहे, जबकि स्थापना काल से जुड़े कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि जिन्होंने पार्टी के लिए संघर्ष किया और कठिन परिस्थितियों का सामना किया, उन्हें अब संगठन में हाशिये पर धकेला जा रहा है।
इसी तरह पूर्व बर्दवान की मंतेश्वर विधानसभा सीट से सिद्दीकुल्ला चौधरी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर विवाद बढ़ गया। उम्मीदवार की घोषणा के तुरंत बाद दो गुटों के समर्थकों के बीच दिगनगर गांव में झड़प हो गई।
बताया जा रहा है कि सिद्दीकुल्ला चौधरी और अहमद हुसैन (मंतेश्वर पंचायत समिति अध्यक्ष) के समर्थकों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि हाथापाई तक की नौबत आ गई। दोनों पक्षों की ओर से बमबाजी के आरोप भी सामने आए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों को मौके पर तैनात करना पड़ा। हालात काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा, जिसमें एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना है।
उत्तर बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले की राजगंज सीट पर भी असंतोष देखने को मिला है। यहां के मौजूदा विधायक खगेश्वर राय ने टिकट नहीं मिलने पर पार्टी पद से इस्तीफा दे दिया है।
तृणमूल ने इस बार इस सीट से एशियाई खेल 2018 की स्वर्ण पदक विजेता एथलीट स्वप्ना बर्मन को उम्मीदवार बनाया है, जो हाल ही में पार्टी में शामिल हुई हैं।
खगेश्वर राय 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के समय से ही ममता बनर्जी के साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2009 के उपचुनाव में पहली बार जीत हासिल की थी और 2011 से लगातार इस सीट से विधायक रहे हैं। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और उनकी जगह ऐसे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया गया है जिसने पार्टी के लिए काम नहीं किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस फैसले का चुनाव परिणाम पर असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उम्मीदवार चयन के बाद सामने आई यह अंदरूनी नाराजगी तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनाव से पहले एक संगठनात्मक चुनौती बन सकती है। हालांकि पार्टी नेतृत्व आमतौर पर ऐसे असंतोष को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश करता रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
