लखनऊ , 18 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के नौ साल पूरे होने पर उत्सव और उत्साह का माहौल है। बुधवार को लोकभवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने अपनी कैबिनेट और नेताओं के साथ उपलब्धियां गिनायी कि कैसे उपद्रव प्रदेश को उत्सव प्रदेश में बदला है, तो वहीं विपक्ष में हताशा और निराशा दिख रही है। आपसी राजनीति में उलझे विपक्षी दलों के पास अब न तो कोई मुद्दा है और न ही उन्हें वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई चमत्कार होने की उम्मीद दिख रही है।

भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव की सरकार उखाड़ फेंकी थी। तब भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए 325 सीटें हासिल की थी, जबकि समाजवादी पार्टी 50 सीट से नीचे ही अटक गयी थी। इस ऐतिहासिक जीत के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ को 18 मार्च 2017 प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। तब उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। योगी आदित्यनाथ ने मार्च 2017 से मार्च 2026 में नौ साल का उपलब्धियों भरा कार्यकाल पूरा किया है।
नौ साल पूरे होने पर लखनऊ में बुधवार को लाेकभवन में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “नव निर्माण के 9 वर्ष” पुस्तक का विमाेचन करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले माफिया राज और भ्रष्टाचार, पलायन और बीमारु राज्य की पहचान वाला उत्तर प्रदेश अब बदल चुका है। यह उपद्रव प्रदेश से उत्सव प्रदेश की यात्रा है। आत्मनिर्भर और विकसित उत्तर प्रदेश बन चुका है, जहां युवाओं का पलायन नहीं होता बल्कि सीएम युवा उद्यमी योजना से लाखों युवा अपने सपने पूरे कर रहे हैं। माफिया राज का खात्मा और कानून व्यवस्था का राज बनाने की सफलता का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों पर ऐसा प्रहार किया कि सपा जैसे दल सफाई देना तो दूर बचाव करने की स्थिति में नहीं हैं।
योगी आदित्यनाथ की आक्रामक शैली से विपक्ष चित
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरल और सहज कार्य संस्कृति से जनकल्याणकारी योजनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन वे आक्रामक शैली में विपक्ष की खामियां गिनाते हैं तो समूचा विपक्ष असहाय सा हो जाता है। जब वे अपने भाषण में वर्ष 2017 से पहले वाले उत्तर प्रदेश के माफिया राज की चर्चा करते हैं तो लोग सहज भरोसा करते हैं और सपा पलटवार करने की छोड़िये, बचाव तक नहीं कर पाती है। बहू-बेटियों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विपक्ष पूरी तरह से चित रहता है। योगी के भाषण में ऐसी घटनाओं और तथ्यों का उल्लेख होता है कि विपक्षी दल सिर्फ सुनते हैं। बजट सत्र में कुछ ऐसा ही हुआ, जब उन्होंने चुन-चुन कर सपा के कारनामों का सदन में जिक्र कर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनायी थीं।
लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संजय गुप्ता की नजर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली एक परिपक्व और मंझे हुए भारतीय नेता की है। वे कहते हैं कि योगी की स्पष्टवादिता और सख्त फैसले लेने की छवि उन्हें लोकप्रिय जननेता के रूप में स्थापित करती है। मुख्यमंत्री योगी के नौ साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और माफियाओं पर प्रहार हुआ और कानून का राज हुआ। बहू-बेटियों को सुरक्षा और युवाओं के पलायन पर रोक लगाना बड़ी उपलब्धि है। प्रो. संजय गुप्ता का कहना है कि योगी के रूप में प्रदेश को एक ऐसा नेता मिला है जो प्रदेश के 25 करोड़ लोगों को ही अपना परिवार मानता है।
एकजुट है एनडीए
उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी घटक दल पूरी तरह से एकजुट हैं। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), निषाद पार्टी, अपना दल (साेनेलाल) और राष्ट्रीय लाेक दल (रालाेद) के विधायक योगी सरकार में शामिल हैं। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उत्साहित हैं और ऐतिहासिक जीत के लिए काम कर रहे हैं। इसकी एक बानगी लखनऊ में बुधवार काे आयोजित समारोह में भी दिखी, जिसमें सहयोगी दल प्रमुखता से शामिल हुए।
विपक्ष एसआईआर को लेकर भ्रम फैलाने में नहीं हुआ सफल
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में मतदाताओं की अद्यतन सूची बनाने, मृत मतदाताओं के नाम हटाने, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के काम में भी विपक्ष ने खूब भ्रम फैलाया। समुदाय विशेष के नाम काटे जाने से लेकर कागज नहीं दिखाएंगे वाले नैरेटिव बनाने में विपक्ष के बडे़ नेताओं की भूमिका रही। आखिरकार विपक्ष पूरी तरह से विफल रहा और प्रदेश में एसआईआर सफलतापूर्वक आगे बढ़ते हुए अब अंतिम चरण में हैं।
आपसी मतभेद और मनभेद में उलझा है विपक्ष
उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) , कांग्रेस, अपना दल कमेरावादी जैसे दल कहने के लिए तो विपक्ष में हैं लेकिन कोई भी दल सपा मुखिया को गठबंधन का नेता मानने के लिए तैयार नहीं हैं। अपना दल कमेरावादी की नेता डाॅ. पल्लवी पटेल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के बीच तकरार सुर्खियों बनती हैं। सरकार के खिलाफ अलग-अलग आंदाेलन कर चुके हैं लेकिन प्रभावी नहीं रहा। ऐसा ही लोकसभा चुनाव की सीटों को लेकर सिरफुटौव्वल की नौबत बनी हुई है। इसी प्रकार बहुजन समाज पार्टी और सपा में भी वाकयुद्ध हो रहा है और दाेनाें में खुद काे सुपर साबित करने की हाेड़ लगी हुई है।
हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह
