रामनवमी मेलों के दौरान सभी अस्पतालों में इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह रहें सक्रिय

लखनऊ, 20 मार्च (हि.स.)। अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग अमित कुमार घोष ने निर्देश दिए हैं कि रामनवमी एवं चैत्र नवरात्रि मेलों के दौरान श्रद्धालुओं एवं आमजन को निर्बाध, सुलभ एवं उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि इस अवधि में स्वास्थ्य सेवाओं की सतत निगरानी और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा या आपात स्थिति का त्वरित समाधान किया जा सके।
अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ये निर्देश शुक्रवार काे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों एवं संबंधित अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक कर दिए। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी दवा की कमी होने पर उसे तत्काल लोकल खरीद या अन्य सरकारी स्रोतों से उपलब्ध कराया जाए, ताकि मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने की आवश्यकता न पड़े।
उन्होंने कहा कि सभी अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी सेवाएं पूरी तरह सक्रिय रहेंगी तथा सीएचसी एवं पीएचसी स्तर पर 108 एवं 102 एम्बुलेंस सेवाओं को पूर्ण रूप से क्रियाशील, आवश्यक उपकरणों एवं दवाओं से सुसज्जित रखा जाए। अनावश्यक रूप से मरीजों को जिला अस्पताल में रेफर न किया जाए। रेफर किया जाना अपरिहार्य होने की स्थिति में मरीज को प्राथमिक उपचार देने के उपरांत ही राजकीय एम्बुलेंस द्वारा जिला चिकित्सालय में शिफ्ट किया जाए।
साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि मेडिकल स्टाफ को बिना अपरिहार्य कारण अवकाश न दिया जाए और सभी कर्मचारी निर्धारित समय पर आईडी कार्ड के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करें। सभी मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके सीएचसी के अधीक्षक व पीएचसी के नियंत्रक अधिकारी मुख्यालय पर उपस्थित रहें व बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के मुख्यालय से बाहर नहीं जाएं।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी वार्डों में इमरजेंसी ट्रे उपलब्ध होनी चाहिए तथा एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी स्नेक वेनम जैसी जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता हर हाल में सुनिश्चित की जाए। मेले वाले जनपदों में तैनात विशेष मेडिकल टीमों तथा आवश्यकता स्थापित अस्थायी चिकित्सालय की निगरानी रखी जाए, ताकि श्रद्धालुओं को त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सुविधा मिल सके और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। मरीजों के साथ विनम्र, सम्मानजनक एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार किया जाए, जिससे उन्हें सकारात्मक अनुभव प्राप्त हो।
उन्होंने अस्पताल परिसरों में ग्लो साइन बोर्ड, 500 मीटर तक डायरेक्शनल साइनेज और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इसके अतिरिक्त स्ट्रेचर एवं व्हीलचेयर की पर्याप्त संख्या में उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया। अस्पताल के प्रवेश द्वार पर ही स्ट्रेचर व व्हीलचेयर उपलब्ध हो।
हिन्दुस्थान समाचार / बृजनंदन
