भुवनेश्वर, 21 मार्च (हि.स.)। विश्व वन दिवस के अवसर पर ओडिशा में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें राज्य के वन संरक्षण, हरित आवरण विस्तार और जनसहभागिता आधारित पहलों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया। इस अवसर पर मोहन चरण माझी ने कहा कि वन प्रकृति का अनमोल उपहार हैं, जो न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं बल्कि मानव जीवन और आजीविका के आधार भी हैं।

भुवनेश्वर स्थित लोकसेवा भवन कन्वेंशन सेंटर में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व वन दिवस का उद्देश्य वनों के महत्व, संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने बताया कि प्रभावी वन प्रबंधन, व्यापक पाैधरोपण अभियान और जनसहभागिता के कारण आज ओडिशा वन संरक्षण और हरित क्षेत्र के विस्तार में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में राज्य में 558 वर्ग किलोमीटर वन और वृक्ष आवरण में वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 37.63 प्रतिशत, यानी 58,597 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वन एवं वृक्षों से आच्छादित है। उन्होंने एक पेड़ माँ के नाम अभियान का उल्लेख करते हुए बताया कि इस पहल के तहत राज्य में एक ही दिन में 1.49 करोड़ पौधों का रोपण किया गया, जबकि एक वर्ष के भीतर 8 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास से अब कम भूमि का उपयोग कर पर्यावरण को क्षति पहुंचाए बिना औद्योगिक विकास संभव हो गया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिकीकरण के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक बन सकते हैं।
इस वर्ष विश्व वन दिवस की थीम “वन और अर्थव्यवस्था” पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वन केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही नहीं, बल्कि आर्थिक विकास के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार वन संरक्षण के साथ-साथ वनों को आजीविका के प्रमुख स्रोत के रूप में विकसित करने के लिए कई योजनाएं सफलतापूर्वक लागू कर रही है।
मुख्यमंत्री ने वन अग्नि की घटनाओं को रोकने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मानवजनित वन आग के मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
कार्यक्रम के दौरान वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री गणेशराम सिंखुंटिआ ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि राज्य सरकार वनवासियों और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने बताया कि वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए वैकल्पिक आजीविका के अवसर सृजित किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने राज्य के दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2036 और 2047 को ध्यान में रखते हुए रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की व्यापक योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में 25 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने ‘ग्रीन इकॉनमी’ की दिशा में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने वन संरक्षण से संबंधित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया, पुस्तकों का विमोचन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले वन अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की उपस्थिति ने इसे और अधिक सार्थक बना दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता महंतो
