—श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के ज्ञानवापी परिसर के प्रतिबंधित एरिया में है विग्रह,वर्ष में एक बार मिलता है दर्शन

वाराणसी, 22 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के धार्मिक नगरी वाराणसी में वासंतिक चैत्र नवरात्र का चौथा दिन आदिशक्ति के गौरी स्वरूप माता श्रृंगार गौरी को समर्पित है। रविवार को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र के ज्ञानवापी परिसर के प्रतिबंधित एरिया में स्थित माता रानी के विग्रह के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वर्ष में सिर्फ एक दिन के लिए खुलने वाले दरबार में कड़ी सुरक्षा के बीच जिला प्रशासन की ओर से निर्धारित अवधि पूर्वांह 09 बजे से सायं सात बजे तक कुल 30556 श्रद्धालुओं ने मातारानी के विग्रह का दर्शन किया।
यह जानकारी श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से दी गई। बताया गया कि काशी के स्थानीय निवासी तथा श्रद्धालु जन परंपरागत रूप से ज्ञानवापी परिसर की पश्चिम दीवार पर उत्कीर्ण साक्ष्यों एवं लोकस्मृति के अनुसार चिन्हित माता श्रृंगार गौरी के स्थान पर दर्शन के लिए पहुंचे। बीते वर्ष 2025 में इस विशेष दिवस के लिए सामान्य दर्शनार्थियों की व्यवस्था निर्बाध चलती रहे इस आशय से मंदिर के द्वार संख्या 4बी को केवल माता श्रृंगार गौरी के दर्शनार्थियों के लिए चिंहित किया गया था। इस वर्ष माता श्रृंगार गौरी के दर्शनार्थियों को संख्या 4बी से प्रवेश दिया गया। बताया गया कि चैत्र नवरात्र के चौथे दिन सायं 07:00 बजे तक श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में 3,39,708 श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन कर लिया था।
बताते चले ज्ञानवापी परिक्षेत्र के अति संवेदनशील क्षेत्र में स्थित मां श्रृंगार गौरी का मंदिर वर्ष में एक दिन चैत्र नवरात्र के चौथे दिन ही खुलता है। ज्ञानवापी परिसर में मस्जिद के पीछे माता रानी का विग्रह हैं। काशी में मान्यता है कि माता रानी के स्वयंभू विग्रह के दर्शन से महिलाओं का श्रृंगार वर्ष भर बना रहता है। आम तौर पर सामान्य दिनों में श्रृंगार गौरी को लाल वस्त्र से ढककर रखा जाता है, लेकिन चैत्र नवरात्र में चौथे दिन एक दिन के लिए उन्हें मुखौटा व लाल चुनरी से सुशोभित किया जाता है।
——भगवती के दर्शन पूजन के बजाय नित्य पूजा का अधिकार दिया जाय
माता श्रृंगार गौरी का दर्शन पूजन करने के बाद ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी केस की पॉचों वादी महिलाओं के साथ उनके अधिवक्ता ने दरबार में नित्य पूजा की मांग की। वादी पक्ष के अधिवक्ता मदन मोहन यादव ने कहा कि ज्ञानवापी- आदि विशेश्वर काशी विश्वनाथ जी के पार्श्व भाग में भगवती श्रृंगार गौरी के मूल विग्रह का स्थान है। बासंतिक नवरात्रि के चतुर्थी तिथि को माता के दर्शन का विधान है।
पांच वादिनी महिलाओं का भी माता श्रृंगार गौरी को लेकर जिला न्यायालय वाराणसी में वाद संस्थित है। जिसका मैं हिन्दू पक्ष का अधिवक्ता हूं। न्यायालय से हमारी मांग है कि साल में केवल एक दिन वासंतिक नवरात्रि की चतुर्थी तिथि को ही भगवती के दर्शन पूजन के बजाय नित्य पूजा का अधिकार दिया जाय।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
