गाजियाबाद, 24 मार्च (हि.स.)। देश में ‘पैसिव यूथेनेशिया’ यानी ‘निष्क्रिय इच्छामृत्यु’ की कानूनी अनुमति पाने वाले पहले व्यक्ति हरीश राणा (31) का मंगलवार को दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया। जिसके बाद अब उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बुधवार सुबह 9 बजे साउथ दिल्ली के ग्रीन पार्क इलाके में किया जाएगा।

इस बात की जानकारी हरीश राणा के पिता अशोक राणा ने सोसाइटी के वॉट्सएप ग्रुप में मैसेज डालते हुए दी। हरीश राणा का परिवार गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहता है। उधर हरीश राणा के निधन की खबर आने के बाद मंगलवार को सोसाइटी के लोग बेहद मायूसी के साथ आपस में चर्चा करते हुए देखे गए।
इच्छामृत्यु देने से पहले हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से ‘वेजिटेटिव स्टेट’ (अचेतन अवस्था) में थे और उनके स्वास्थ्य में किसी भी तरह का सुधार नहीं हो रहा था। ऐसे में उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए उनकी इच्छा मृत्यु की इजाजत मांगी थी। जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने 11 मार्च को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हरीश के शरीर से जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति दी थी।
जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने माना था कि हरीश के स्वास्थ्य में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं बची है, इसलिए उन्हें चिकित्सकीय सहायता के जरिए दी जा रही पोषण और हाइड्रेशन सेवा को बंद करने की अनुमति दी जाती हैं।
बेटे के लिए इच्छामृत्यु की इजाजत मिलने के बाद हरीश के पिता अशोक राणा ने भावुक होते हुए कहा था, ‘हम पिछले तीन वर्षों से इस कानूनी लड़ाई को लड़ रहे थे। कोई भी माता-पिता अपने बेटे के लिए ऐसी स्थिति नहीं चाहेंगे, लेकिन उनकी तकलीफ देखी नहीं जा रही थी।’ उन्होंने बताया था कि हरीश पंजाब यूनिवर्सिटी के टॉपर रहे थे, लेकिन 2013 में एक इमारत से गिरने के बाद वे कभी होश में नहीं आ सके।‘पैसिव यूथेनेशिया’ का अर्थ है किसी ऐसे मरीज का जीवन रक्षक उपचार या दवाएं बंद कर देना, जिसके ठीक होने की कोई संभावना न हो, ताकि उसे प्राकृतिक रूप से मृत्यु प्राप्त हो सके। राणा के वकील मनीष जैन ने बताया कि अदालत ने अनुच्छेद 21 के तहत हरीश को इच्छामृत्यु का अधिकार प्रदान किया था। यह निर्णय 2018 के ‘कॉमन कॉज बनाम भारत संघ’ मामले में तय किए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर लिया गया है। इस फैसले के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर ‘यूथेनेशिया रिव्यू बोर्ड’ का गठन करें और नियमित रूप से संबंधित मंत्रालयों को अपनी रिपोर्ट भेजें।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश चौधरी
