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विवेक शुक्ला
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के इस साल शुरू होने से पहले ही बड़ा धमाका हो गया। यह धमाका तब हुआ जब खबर आई कि बैंगलुरु की टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने इतिहास रच दिया है। यूनाइटेड स्पिरिट्स लिमिटेड (डीएजियो की सहायक कंपनी) ने आरसीबी को आदित्य बिड़ला ग्रुप, टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप, बोल्ट वेंचर्स (डेविड ब्लिट्जर) और ब्लैकस्टोन के BXPE फंड के कंसोर्टियम को 1.78 बिलियन डॉलर (लगभग 16,660 करोड़ रुपये) में बेच दिया। यह आईपीएल फ्रेंचाइजी इतिहास की अब तक की सबसे महंगी डील बन गई है। इस डील ने राजस्थान रॉयल्स की 15,290 करोड़ रुपये की बिक्री को भी पीछे छोड़ दिया। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर आरसीबी इतनी महंगी क्यों बिकी? इसमें ऐसा क्या खास है जो इसे वैश्विक स्तर पर इतना आकर्षक एसेट बनाता है?
आरसीबी की कहानी 2008 में आईपीएल के पहले सीजन से शुरू होती है। विजय माल्या की यूनाइटेड ब्रेवरीज ने इसे 111.6 मिलियन डॉलर (तब करीब 446 करोड़ रुपये) में खरीदा था। उस समय यह मुंबई इंडियंस के बाद दूसरी सबसे महंगी टीम थी।
बाद में डीएजियो ने यूनाइटेड स्पिरिट्स के जरिए टीम पर नियंत्रण हासिल किया। 18 वर्षों में आरसीबी की वैल्यूएशन में लगभग 1495% का उछाल आया, यानी इसकी कीमत मूल निवेश से लगभग 16 गुना बढ़ गई। यह सिर्फ खेल प्रदर्शन का परिणाम नहीं बल्कि एक मजबूत ब्रांड बिल्डिंग का उदाहरण है।
2025 की जीत: टर्निंग पॉइंट बीते साल 2025 में आरसीबी ने आईपीएल और महिला प्रीमियर लीग (WPL) दोनों खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। इस जीत ने टीम को डिफेंडिंग चैंपियन बना दिया और उसके ब्रांड को नई ऊंचाई दी।
हालांकि, सिर्फ ट्रॉफियां ही इसकी ऊंची वैल्यू की वजह नहीं हैं। असली ताकत इसके ब्रांड वैल्यू, फैन बेस और मार्केट पोजिशन में छिपी है।
ब्रांड पावर और विशाल फैन बेस आरसीबी की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल और वफादार फैन बेस है। “आरसीबी आर्मी” न सिर्फ बैंगलुरु बल्कि पूरे दक्षिण भारत और देशभर में फैली हुई है। यह टीम भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुकी है।
ब्रांड फाइनेंस रिपोर्ट 2025 के अनुसार, आरसीबी का ब्रांड वैल्यू 269 मिलियन डॉलर (लगभग 2,486 करोड़ रुपये) है, जो आईपीएल में सबसे ज्यादा है। यह मुंबई इंडियंस (242 मिलियन) और चेन्नई सुपर किंग्स (235 मिलियन) से भी आगे है।
सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स, यूट्यूब व्यूज और डिजिटल एंगेजमेंट के मामले में भी आरसीबी शीर्ष पर बनी हुई है। चिन्नास्वामी स्टेडियम का शानदार माहौल और लगातार भरी रहने वाली दर्शक दीर्घाएं गेट रेवेन्यू को मजबूत बनाती हैं।
मजबूत रेवेन्यू मॉडल बैंगलुरु एक प्रमुख टेक हब होने के कारण आरसीबी को कॉर्पोरेट स्पॉन्सरशिप्स भी आसानी से मिलती हैं। 2025 में टीम की कुल रेवेन्यू 504 करोड़ रुपये रही।
इसमें बीसीसीआई के सेंट्रल रेवेन्यू पूल (ब्रॉडकास्ट और स्पॉन्सरशिप शेयर) का बड़ा योगदान रहा, लेकिन टीम-ओन्ड रेवेन्यू जैसे मर्चेंडाइजिंग, टिकट बिक्री और लोकल स्पॉन्सर्स से भी 270-300 करोड़ रुपये की कमाई हुई।
यह विविध रेवेन्यू मॉडल निवेशकों के लिए इसे और आकर्षक बनाता है।
विराट कोहली: सबसे बड़ा ब्रांड एसेट आरसीबी की पहचान उसके स्टार खिलाड़ी विराट कोहली से जुड़ी है। 2008 से लगातार एक ही टीम के लिए खेलने वाले कोहली आईपीएल के सबसे वफादार खिलाड़ियों में से एक हैं।
उनकी लोकप्रियता, ब्रांड वैल्यू और ग्लोबल अपील ने आरसीबी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोहली अकेले टीम की वैल्यू में 200-300 मिलियन डॉलर (लगभग 1,700-2,500 करोड़ रुपये) तक का योगदान देते हैं।
आईपीएल 2016 में 973 रन बनाने वाले कोहली आज भी 37 साल की उम्र में फिटनेस और प्रदर्शन का शानदार उदाहरण हैं। उनकी मौजूदगी ने आरसीबी को “ट्रॉफीलेस” दौर में भी चर्चा में बनाए रखा।
आईपीएल: एक ग्लोबल बिजनेस प्लेटफॉर्म आईपीएल का कुल बिजनेस वैल्यू 2025 में 18.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। 2023-27 के मीडिया राइट्स डील ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
सेंट्रल रेवेन्यू शेयर हर टीम को स्थिर आय देता है, जबकि डिजिटल कंटेंट, मर्चेंडाइज और इंटरनेशनल एक्सपैंशन से अतिरिक्त कमाई के रास्ते खुलते हैं। यही वजह है कि ब्लैकस्टोन और बोल्ट वेंचर्स जैसे वैश्विक निवेशक इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
नए मालिकों की रणनीतिक ताकत आरसीबी के नए मालिकों का कंसोर्टियम भी इस डील को खास बनाता है। आदित्य बिड़ला ग्रुप इंडस्ट्रियल ताकत और ब्रांडिंग विशेषज्ञता लाएगा। टाइम्स ग्रुप अपनी मीडिया संपत्तियों के जरिए टीम की डिजिटल और वैश्विक पहुंच को बढ़ाएगा।
ब्लैकस्टोन की वित्तीय क्षमता और डेविड ब्लिट्जर का स्पोर्ट्स निवेश अनुभव मिलकर आरसीबी को एक नए स्तर पर ले जा सकते हैं।
खास बात यह है कि टीम का नाम “रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु” ही रहेगा।
अंडरडॉग से चैंपियन तक आरसीबी की कहानी सिर्फ जीत की नहीं, बल्कि संघर्ष और भावनात्मक जुड़ाव की कहानी है। 17 साल तक ट्रॉफी का इंतजार और फिर 2025 में डबल चैंपियन बनना- यह सफर इसे खास बनाता है।
बैंगलुरु का युवा और टेक-सेवी ऑडियंस, कोहली का इमोशनल कनेक्शन और मजबूत फैन एंगेजमेंट इसे एक “इमोशनल ब्रांड” बनाते हैं।
नए मालिकों के पास आरसीबी को और आगे ले जाने के कई मौके हैं। क्रिकेट अकादमी, महिला क्रिकेट, डिजिटल कंटेंट और ग्लोबल टूर जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया जा सकता है।
यह डील इस बात का प्रतीक है कि आईपीएल अब सिर्फ एक क्रिकेट लीग नहीं, बल्कि एक “स्पोर्ट्स-मीडिया-एंटरटेनमेंट बिजनेस” बन चुका है।
आरसीबी की यह ऐतिहासिक बिक्री साबित करती है कि आज के दौर में ब्रांड पावर, फैन लॉयल्टी और मार्केट वैल्यू ट्रॉफियों से कहीं ज्यादा मायने रखते हैं। बैंगलुरु की सड़कों पर गूंजने वाला “आरसीबी” का नारा अब और बुलंद होगा।
आरसीबी अब सिर्फ एक क्रिकेट टीम नहीं, बल्कि 16,660 करोड़ रुपये का एक ग्लोबल ब्रांड है- जिसकी असली ताकत उसके फैंस के दिलों में बसती है।
(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
