-मनोज कुमार मिश्र

27 साल लंबे अंतराल के बाद दिल्ली की सत्ता पाने वाली भाजपा ने अपने दूसरे ही बजट में वह सारी घोषणाएं की है, जिससे उसके स्थाई वोट बैंक में बढ़ोतरी हो सके। लगातार तीन बार दिल्ली की सभी सातों लोकसभा सीटों और साल 2022 से पहले के तीन नगर निगम चुनाव जीतने वाली भाजपा, दिल्ली विधानसभा चुनाव में लगातार छह बार पराजित रही लेकिन पिछले साल केवल ढाई फीसदी के अंतराल से चुनाव जीतकर सत्ता में आई।
इसी 24 मार्च को 2026-27 का बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रेखा गुप्ता ने इसे हरित बजट का नाम दिया। इस बजट में जिस तरह की दनादन घोषणाएं की गई हैं, उससे वास्तव में यह चुनावी बजट जैसा लगता है। अगले साल के आखिर में होने वाले दिल्ली नगर निगम चुनाव से पहले दिल्ली सरकार का एक और बजट ही आ पाएगा। नगर निगम चुनाव 05 दिसंबर, 2022 को हुए थे। साल 2022 से पहले तीन नगर निगम चुनाव जीतने के बावजूद भाजपा का वोटबैंक नहीं बढ़ पा रहा है। इसमें अपवाद लोकसभा चुनाव ही है। जिसमें भाजपा को दिल्ली में औसत 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिलते रहे हैं।
इस बजट का फोकस महिला वर्ग है। महिलाओं का समर्थन मिलने से ही बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई में लगातार राजग और मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती रही है। इसी के बूते महाराष्ट्र में फिर से राजग की सरकार बनी। लाडली योजना के बजाए लखपति बिटिया योजना, बिहार की तर्ज पर 9 वीं की 1.30 लाख बच्चियों को मुफ्त साइकिल दी जाएगी। बजट पेश होने के साथ इस पर अमल करते हुए एक समारोह में 1100 बच्चियों को मुख्यमंत्री ने साइकिल बांटी। इस पर सरकार 90 करोड़ रुपए खर्च करेगी। 10वीं के मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटाप देने पर दस करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया है। इस पर भी अमल शुरु हो गया है।
महिलाओं की तरह किन्नरों को भी बसों के फ्री पास, एक हजार महिलाओं और 100 किन्नरों को ई-आटो की परमिट, महिला सुरक्षा के तहत डार्क स्पाट खत्म करने और महिला समृद्धि योजना के तहत महिलाओं को 2500 रुपए हर महीने देने के मद में 5110 करोड़ रुपए आवंटित किए गए। यह अलग विषय है कि सरकार बने साल बीत जाने के बावजूद महिलाओं को पैसे मिलना शुरु नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समिति बनाकर पात्र महिलाओं की पहचान की गई। अब तुरंत नियमित पैसे दिए जाएंगे।
इस बार बजट में 3700 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई है।
27 साल बाद पिछले साल फरवरी दिल्ली में बनी भाजपा सरकार ने साल 2025-26 का रिकार्ड एक लाख करोड़ का बजट पेश किया। विधानसभा चुनाव में जिस तरह के वायदे किए गए थे, उसमें यह बजट भी नाकाफी रहा। दिल्ली में दस साल प्रचंड बहुमत से सरकार चलाने वाली आम आदमी पार्टी (आआपा) पर भाजपा समेत सभी विरोधी दल मुफ्त की रेवड़ियां बांटने का आरोप लगाती रही। अब भाजपा सरकार भी उन मुफ्त की रेवड़ियों को दूसरे साल भी जारी रखने का ऐलान किया। भाजपा को इसका फायदा समझ में आने लगा है। इतना ही नहीं, दनादन मुफ्त बिजली-पानी के अलावा बजट में कई और रेवड़ियों की घोषणा कर दी। इस साल भी होली-दीवाली पर मुफ्त गैस सिलेंडर देने पर 260 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि यह दिल्ली को और हरा-भरा बनाने वाला हरित बजट है। बजट मद का 21 फीसदी धन दिल्ली को हरा-भरा बनाने पर खर्च किया जाएगा। दिल्ली में ई-आटो, ई-टैक्सी और ई-बसें बड़ी तादाद में चलाई जाएंगी। दिल्ली के अलावा एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में ई-बसों का परिचालन शुरु हो गया है। मेट्रो रेल के चौथे और पांचवें चरण की न केवल मंजूरी दी गई है बल्कि उसके लिए 2224 करोड़ रुपए का बजट भी आवंटित कर दिया गया है। इसी तरह नमो भारत के दो नए कॉरिडोर की मंजूरी दी गई है। इसके लिए 568 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
दिल्ली नगर निगम को इस बार सर्वाधिक 11,666 करोड़ रुपए देने का प्रावधान किया गया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विद्यार्थी राजनीति के बाद नगर निगम से ही अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की है। तीन निगमों को एक करके 272 सीटों को 250 सीट करके पांच दिसंबर, 2022 में निगम चुनाव करवाए गए। लगातार तीन बार से निगम की सत्ता में रही भाजपा उस चुनाव में पिछड़ गई और 134 सीटें लाकर आआपा पहली बार नगर निगम की सत्ता में आ गई। उसे हर बार 36 फीसदी के आसपास वोट मिलते रहे। भाजपा को 106 सीटें आई। नगर निगम में दलबदल विरोधी विधेयक लागू नहीं है। दो साल में दल बदलने वाले निगम पार्षदों के बूते भाजपा फिर से निगम में बहुमत में आ गई। सालों बाद केन्द्र के बाद दिल्ली की सत्ता में भाजपा के आने के बाद वह किसी भी तरह से अगले साल होने वाले चुनाव को जीतने का प्रयास करेगी।
वैसे अभी सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। उसका सामना करने और उसका निबटारा करने के लिए सरकार को लगातार युद्धस्तर पर काम करना होगा। मुफ्त की रेवड़ियां बांटने के अलावा दिल्ली के बुनियादी ढांचे में बड़ा बदलाव होता नहीं दिख रहा। इस बजट में नया सचिवालय, कई सरकारी उपक्रमों के भवन और दिल्ली सरकार के कर्मचारियों के लिए आवास बनाने इत्यादि की घोषणा की गई है। दस केन्द्रीय विद्यालय और एक सैनिक स्कूल बनाने के वायदे किए गए हैं। पहले के विश्वविद्यालयों के कैंपस बनाने के लिए बजट में प्रावधान किए गए हैं।
वायदे के मुताबिक मंत्रिमंडल की पहली बैठक में आम लोगों को मुफ्त उपचार के लिए आयुष्मान योजना न केवल दिल्ली में लागू किया गया। अबतक इस योजना में सात साख से ज्यादा लोग पंजीकरण कराकर इसका लाभ उठा रहे हैं। अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और वार्ड आदि बढ़ाने की घोषणा तो की गई है लेकिन नए अस्पताल बनाने की घोषणा नहीं हुई है। दिल्ली में देश का सर्वाधिक न्यूनतम वेतन 22,411 रुपए प्रति महीना लागू किया गया।
कामकाजी महिलाओं की सुविधा के लिए पांच सौ पालन केन्द्र खोले गए हैं। परिवहन क्षेत्र में चार हजार से अधिक ई-बसें चलाई गई है। नौ हजार से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं। नई ईवी नीति, ई- बाइक, ई-टैक्सी को बढ़ावा देने के अलावा दिल्ली के आखिरी छोर तक सार्वजनिक वाहन को पहुंचाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। वैसे सरकार को हाई कोर्ट के हलफनामे के हिसाब से 11 हजार बसों को सड़क पर लाने की भी चुनौती है।
यमुना साफ करने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है।
37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 28 को अपग्रेड किया गया है, नौ पर काम चल कहा है। 12 नए संयंत्र बनेंगे। दिल्ली को वायु प्रदूषण से मुक्त करने से लेकर दिल्ली के मूलभूत ढांचे को विकसित करने से लेकर दिल्ली को आधुनिकतम सुविधाओं से युक्त शहर बनाने के प्रयास के लिए दिल्ली सरकार केन्द्र की सरकार के सहयोग से दिन-रात काम कर रही है।
1993 में दिल्ली में नए प्रशासनिक ढांचे में विधानसभा बनने पर हुए पहले चुनाव में भाजपा की सरकार बनी। पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद उस सरकार ने कई ठोस काम किए। पहली बार यमुना के जल में राज्य की तरह दिल्ली को हिस्सा मिला। दिल्ली सरकार ने अपने अधिकार बढ़ाकर बिजली बोर्ड बनाकर बिजली का उत्पादन बढ़ाया। नए स्कूल-कॉलेज ही नहीं, नया विश्वविद्यालय बनाया गया। नए अस्पताल बने और बड़ी संख्या में दिल्ली के हर कोने में निर्माण कार्य हुए। दिल्ली मेट्रो की नींव रखी गई। 1984 के सिख दंगा पीडितों को न्याय दिलाने के प्रयास हुए।
इस सिलसिले को साल 1998 में शीला दीक्षित की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार ने और आगे बढ़ाया। दिल्ली के मूलभूत ढांचे के विकसित करने की सर्वाधिक श्रेय शीला दीक्षित के जाता है। पूरी दिल्ली में काम हुए। दिल्ली फ्लाईओवर का शहर हो गया।
फिर दस साल प्रचंड बहुमत से आम आदमी पार्टी(आआपा) की सरकार बनी। उसके बाद सालभर पहले भाजपा की सरकार बनी। चुनाव प्रचार में भाजपा के नेताओं के वायदों में से कुछ पर तो अमल शुरू हो गए हैं लेकिन काफी काम अभी करने बाकी हैं। आआपा शासन के दस साल ने दिल्ली में विकास की दिशा ही बदल दी थी, जिसे वापस पटरी पर लाना भाजपा सरकार के लिए पहली चुनौती थी।
दिल्ली की समस्या अनोखी है। उसका इलाका तो 1483 किलोमीटर ही रहना है लेकिन आबादी बेहिसाब बढ़ रही है। दिल्ली की आबादी में हर साल पांच लाख अतिरिक्त आबादी जुड़ती है। देश की राजधानी होने और नोट-वोट की राजनीति में कोई भी राजनीतिक दल इस पर अंकुश लगाना नहीं चाहता है। दिल्ली का अपना कुछ नहीं है। मौसम से लेकर बिजली-पानी के लिए दिल्ली पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली की सड़क भी एक सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ सकती। लोक निर्माण विभाग की 1400 किलोमीटर सड़कों में से पहले साल में 750 किलोमीटर सड़कों की वाल-टू-वाल कारपेंटिंग किया जाएगा। सड़कों पर आवागमन सुगम करने के लिए नए फ्लाईओवर और 40 नए फुट ओवरब्रिज का काम हो रहा है।
दिल्ली को वायु प्रदूषण से मुक्त करने के लिए वायु प्रदूषण शमन योजना बनाई गई है। सरकार का फोकस दिल्ली की साफ सफाई पर है, इसमें उसे काफी सफलता मिली। ओलंपिक आदि जीतने वाले खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि बढ़ाई गई है। राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी करने वाले खिलाड़ियों को बीस लाख रुपए की सहायता दी जा रही है।
सरकार का दावा है कि दिल्ली में हर रोज निकलने वाले 11 हजार मीट्रिक टन कचरे का निबटान करने की व्यापक योजना बनने से कूड़े के नए पहाड़ बनेंगे। इतना ही नहीं कूड़े के पहाड़ों से भी दिल्ली को जल्दी ही निजात मिल जाएगी। सरकार ने फीस रेगुलेशन बिल विधानसभा में पास करके निजी स्कूलों पर लगाम लगाई। इस साल 44 करोड़ रुपए की छात्रवृति बांटी गई। इस सरकार के सामने यमुना को साफ करने की बड़ी चुनौती है। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने यमुना की आरती शुरू करवाई और यमुना को साफ करने का संकल्प लिया।
इस सरकार के सामने चुनौतियां बहुत हैं तो अवसर भी भरपूर है। केन्द्र से लेकर नगर निगम में भाजपा सत्ता में है। दिल्ली की भाजपा सरकार के पास पार्टी का जनाधार बढ़ाने और दिल्ली के हर चुनाव में जीत का स्थाई सिलसिला कायम रखने का मौका है। दिल्ली की भाजपा सरकार बजट को इसका माध्यम बनाते दिख रही है।
(लेखक, जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश
