पौड़ी गढ़वाल, 03 अप्रैल (हि.स.)। प्रकृति पर्यावरण संस्थान एवं उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा संयुक्त रूप से एकेश्वर ब्लाक के सतपाली गांव में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला गढ़वाल हिमालय की पारंपरिक सतत कृषि प्रणाली: चुनौतियां एवं संभावनाएं विषय पर आधारित रही।

शुक्रवार को आयोजित कार्यशाला में मुख्य वक्ता गढ़वाल विश्वविद्यालय के डा. अंकित सती ने वर्तमान समय में पारंपरिक कृषि की प्रमुख चुनौतियों को चिह्नित करते हुए मोटे अनाज के महत्व से ग्रामीणों को अवगत कराया। उन्होंने मोटे अनाज के गुणों के साथ-साथ नई तकनीकों के प्रयोग को पारंपरिक खेती के लिए आवश्यक बताया। प्रकृति पर्यावरण संस्थान के भोपाल चौधरी ने सरकारी योजनाओं के प्रति ग्रामीणों की जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया।
एनआरएमएस के सचिव डा. कपिल पंवार ने कहा कि वर्तमान समय में ग्रामीणों को आपसी सामंजस्य एवं सहयोग से गांवों को पुन सशक्त बनाना होगा। कहा कि स्वयं सहायता समूहों को सुदृढ़ कर पलायन पर नियंत्रण के साथ-साथ आजीविका के साधनों को गाँवों में ही विकसित किया जा सकता है। कार्यक्रम संयोजक डा. अंकित उछोली ने योजनाओं में जनसहभागिता को आवश्यक बताते हुए इस प्रकार की कार्यशालाओं के नियमित आयोजन पर बल दिया तथा सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर ग्राम प्रधान बबीता नेगी, कविता डोबरियाल आदि शामिल रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह
