
अशोकनगर, 03 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में फंसे पेंच ने मदिरा प्रेमियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। जिला मुख्यालय सहित 14 प्रमुख दुकानों की नीलामी पर होल्ड लगने के कारण 1 अप्रैल से ही इन दुकानों के शटर बंद हैं, जिससे शहर में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग शराब के लिए भटकते नजर आ रहे हैं।

नीलामी में आया मोड़, 6.77 करोड़ जमा करने के बाद पीछे हटा समूह
जानकारी के अनुसार, मार्च में जिले की 33 कंपोजिट शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसी दौरान रामकुमार रघुवंशी ग्रुप ने 14 दुकानों के लिए 5 प्रतिशत सिक्योरिटी राशि के रूप में करीब 6 करोड़ 77 लाख रुपये जमा किए, लेकिन बाद में संचालन को लेकर असहमति जता दी। इसके चलते विभाग ने इन दुकानों के लिए री-नीलामी प्रक्रिया शुरू की।
शिकायतों के बाद प्रक्रिया पर लगा ब्रेक
री-नीलामी पूरी होने के बाद भी मामला शांत नहीं हुआ और कलेक्टर के पास अनियमितताओं को लेकर शिकायतें पहुंच गईं। इसके चलते प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को फिलहाल होल्ड पर डाल दिया है, जिससे नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के बावजूद दुकानें नहीं खुल सकीं।
इन इलाकों की दुकानें प्रभावित
इस निर्णय से अशोकनगर शहर की 3 दुकानों के अलावा ईसागढ़ (2), मोहरीराय, इमला, कदवाया, पारसोल, ढाकौनी, शाढ़ौरा, झीला, नईसराय और महीदपुर क्षेत्र की दुकानें प्रभावित हैं।
विभाग का प्लान-बी: खुद संभाल सकता है संचालन
राजस्व हानि को देखते हुए आबकारी विभाग ने वैकल्पिक योजना तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जल्द ही विवाद नहीं सुलझा और होल्ड नहीं हटा, तो विभाग खुद इन दुकानों का संचालन संभालते हुए सरकारी नियंत्रण में शराब बिक्री शुरू कर सकता है।
ब्लैक मार्केटिंग बढ़ने की आशंका
मुख्य दुकानों के बंद होने से अन्य खुली दुकानों पर भीड़ बढ़ गई है। वहीं, जानकारों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबी चली तो जिले में अवैध शराब और ब्लैक मार्केटिंग का खतरा बढ़ सकता है। अब सभी की नजरें प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हैं—या तो नीलामी प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, या फिर सरकार खुद दुकानों का संचालन संभालेगी।
हिन्दुस्थान समाचार / देवेन्द्र ताम्रकार
