यमुनानगर, 04 अप्रैल (हि.स.)। यमुनानगर स्थित हथनीकुंड बैराज की सुरक्षा के लिए बनाई जा रही 146 करोड़ रुपये की डायाफ्राम वॉल के निर्माण में जंग लगे सरिये के उपयोग के आरोप लगे हैं, जिससे परियोजना की गुणवत्ता और बैराज की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई जा रही है।

समाचार एंजेसी काे प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बैराज को संरचनात्मक नुकसान पहुंचा है। समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण इसका बेस स्तर काफी नीचे चला गया, जिसे सुरक्षा के दृष्टिकोण से जोखिमपूर्ण माना गया। इसके बाद हरियाणा सिंचाई विभाग ने मामले को केंद्रीय स्तर पर उठाया, जिस पर सेंट्रल वॉटर कमिशन की टीम ने निरीक्षण कर डिजाइन और तकनीकी मानक निर्धारित किए। निर्धारित योजना के तहत डायाफ्राम वॉल का निर्माण कार्य पिछले वर्ष शुरू हुआ था, जिसे जून तक पूरा किया जाना था। हालांकि संसाधनों की कमी और अन्य कारणों से कार्य समय पर पूरा नहीं हो सका। बाद में इसे मार्च 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया, लेकिन अब तक लगभग 70 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है। अब इसे मानसून से पूर्व मई तक पूर्ण करने का प्रयास किया जा रहा है। इस बीच निर्माण स्थल पर रखे सरिये में जंग लगने और उसी सामग्री के उपयोग के आरोप सामने आए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे निर्माण में उच्च गुणवत्ता और जंग-रोधी सरिये का इस्तेमाल अनिवार्य होता है, विशेषकर उन हिस्सों में जो पानी और जमीन के भीतर रहते हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता विजय गर्ग ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया जा रहा है और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्थल पर तकनीकी स्टाफ तथा परीक्षण प्रयोगशाला की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। परियोजना की संवेदनशीलता को देखते हुए इसके निर्माण की गुणवत्ता पर प्रशासन और विशेषज्ञों की निगरानी अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह परियोजना भविष्य में बड़े जानमाल के जोखिम का कारण बन सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार
