उदयपुर, 04 अप्रैल (हि.स.)। भीषण गर्मी के बीच जहां आमजन दोपहर में घर से निकलने से बचते हैं, वहीं उदयपुर जिले में एक संत भरी दुपहरी में अग्नि के बीच बैठकर कठोर तपस्या कर रहे हैं। उदयपुर जिले के भींडर-सलूंबर मार्ग पर भींडर कस्बे से लगभग 13 किलोमीटर दूर डेरावड़ स्थित रूपनाथजी मठ में 21 दिवसीय नव धूणी अग्नि तपस्या का शुभारंभ हुआ है। यह तपस्या 23 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक की जाएगी।

नाथ सम्प्रदाय के महंत योगी प्रेमनाथ महाराज जनकल्याण और विश्व शांति की कामना के साथ इस तपस्या को कर रहे हैं। उनके चारों ओर नौ धधकती धूणियां जलाई जाती हैं, जिनमें कंडों की आग निरंतर प्रज्वलित रहती है। तेज धूप और अग्नि की तपन के बीच महंत करीब तीन घंटे तक साधना में लीन रहते हैं। यह कठोर तपस्या इससे पहले पांच बार आयोजित हो चुकी है और इस वर्ष इसका छठा आयोजन है।
तपस्या के शुभारंभ से पूर्व सुबह हींता गांव से प्रभात फेरी निकाली गई। इसके बाद माँ हिंगलाज माता की विधिवत आरती की गई और भजन-कीर्तन के साथ कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय हो गया। गुरुदेव के नव धूणी स्थल पर पहुंचने के बाद गुरु गोरक्षनाथ के समक्ष दीप प्रज्वलन किया गया। इसके पश्चात नव धूणी की आरती, पूजन और हवन सम्पन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने शंख से जल अर्पित कर परिक्रमा की।
दोपहर करीब 12 बजे महंत प्रेमनाथ ने पूरे शरीर पर भभूति धारण कर अग्नि के मध्य आसन ग्रहण किया और तीन घंटे तक तपस्या की। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर उनके दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
कार्यक्रम में रतलाम से मीठूदास महाराज, गोगुंदा से दौलत गिरि महाराज, कुंडाल से डालूदास महाराज और राजसमंद से पागलनाथ महाराज सहित कई संत-महात्मा उपस्थित रहे। अंत में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया। मठ समिति के अनुसार यह अनुष्ठान प्रतिदिन निर्धारित समय पर 23 अप्रैल तक जारी रहेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनीता
