जम्मू, 06 अप्रैल (हि.स.)। युवा राजपूत सभा (वाईआरएस) ने ऐतिहासिक पहचान को पुनर्स्थापित करने की दिशा में कदम उठाते हुए अखनूर पुल पर “युवराज कर्ण सिंह ब्रिज” नाम का होर्डिंग बोर्ड स्थापित किया। संगठन का दावा है कि वर्ष 1931 में बने इस पुल का मूल नाम युवराज कर्ण सिंह के नाम पर रखा गया था जो समय के साथ सरकारी उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर हो गया। सभा ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे गए लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है।

कार्यक्रम के दौरान युवा राजपूत सभा के मुख्य प्रवक्ता विशाल सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि संगठन के सैकड़ों सदस्य और समर्थक अखनूर पुल पर एकत्र हुए और शांतिपूर्ण तरीके से “युवराज कर्ण सिंह ब्रिज” नाम का होर्डिंग लगाया। इस मौके पर युवा राजपूत सभा के अध्यक्ष मंदीप सिंह रिम्पी, पूर्व अध्यक्ष विक्रम सिंह विक्की, राजन सिंह हैप्पी, संस्थापक सदस्य राजिंदर सिंह, राजेश सिंह, रणजीत सिंह, कोर कमेटी सदस्य पुशविंदर सिंह, मोहन सिंह और बबलू सिंह सहित बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।
सभा ने दोहराया कि यह मांग ऐतिहासिक तथ्यों और जनभावनाओं पर आधारित है तथा प्रशासन से अपील की कि “युवराज कर्ण सिंह ब्रिज” नाम को आधिकारिक रूप से बहाल करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। संगठन ने यह भी कहा कि ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान को संरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ जिसमें सदस्यों ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी इस मुहिम को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा
