कानपुर, 07 अप्रैल (हि.स.)। कृषि एवं खाद्य क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं के बीच युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना आवश्यक है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक रूप से सक्षम बनाना है। इससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्रशिक्षित करना समय की जरूरत है। “वर्तमान समय में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विशेषज्ञता की मांग तेजी से बढ़ रही है। यह बातें मंगलवार को स्कूल ऑफ एडवांस एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने कही।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को आधुनिक कृषि तकनीकों, प्रबंधन कौशल एवं खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में दक्ष बनाना है, जिससे वे बेहतर रोजगार अवसर प्राप्त कर सकें।
विश्वविद्यालय द्वारा संचालित एमएससी कृषि (मृदा विज्ञान) एवं एमएससी कृषि (पादप रोग विज्ञान) में 10-10 सीटें निर्धारित हैं। दोनों पाठ्यक्रम दो वर्ष के हैं तथा वार्षिक शुल्क 51,200 रुपये रखा गया है। इन पाठ्यक्रमों में मृदा प्रबंधन, फसल रोग नियंत्रण एवं कृषि अनुसंधान से जुड़े विषय पढ़ाए जाएंगे।
इसके अलावा बीएससी (ऑनर्स) फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी चार वर्षीय पाठ्यक्रम है, जिसमें 40 सीटें उपलब्ध हैं और इसकी वार्षिक फीस 41,200 रुपये है। इस कोर्स में खाद्य संरक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण एवं प्रोसेसिंग तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
एग्रीबिजनेस मैनेजमेंट (एमबीए-एबीएम) में भी 40 सीटों पर प्रवेश होगा। यह दो वर्षीय पाठ्यक्रम है, जिसकी वार्षिक फीस 71,200 रुपये निर्धारित की गई है। इसमें कृषि आधारित व्यवसाय, मार्केटिंग, वित्त एवं सप्लाई चेन प्रबंधन पर विशेष फोकस किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त बीएससी (ऑनर्स) एग्रीकल्चर, एमएससी (कृषि) एग्रोनॉमी, हॉर्टिकल्चर एवं अन्य पाठ्यक्रम भी संचालित हैं। सभी कोर्स में प्रवेश निर्धारित योग्यता के आधार पर होगा। इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय की वेबसाइट या प्रवेश कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
