हुगली, 08 अप्रैल (हि. स.)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गहरी चिंता जताई है और इस मुद्दे पर एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के संकेत दिए हैं। चुनावी सभाओं में उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।

जानकारी के अनुसार, ‘विचाराधीन’ मतदाताओं के दस्तावेजों के निपटारे के बाद राज्य की मतदाता सूची से कुल 91 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जिनमें अंतिम चरण में 27 लाख नाम शामिल हैं। इन मतदाताओं का भविष्य क्या होगा, इस पर अब तक कोई स्पष्टता नहीं है।
बुधवार सुबह भवानीपुर सीट से नामांकन दाखिल करने के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटाया जाना चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि उनकी कानूनी पहल के बाद 1.20 करोड़ में से 32 लाख नाम बहाल किए गए, लेकिन अब भी 58 लाख मामलों का निपटारा नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल में अपील का अधिकार दिया था, तो उससे पहले मतदाता सूची को ‘फ्रीज’ क्यों कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि मैं भले ही साधारण व्यक्ति हूं, लेकिन एक वकील के तौर पर मुझे लगता है कि हमें फिर से अदालत जाना चाहिए।
आरामबाग की सभा में उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि जिनके घर जाकर “मोटा भाई” ने भोजन किया था, उनके परिवार के नाम भी सूची से हटा दिए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में 62 हजार मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह नाम काटकर कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा और जनता तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में ही मतदान करेगी। उन्होंने इस प्रक्रिया की तुलना असम के एनआरसी से करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर भ्रम और भय का माहौल बना रही है।
इसके साथ ही ममता बनर्जी ने भाजपा पर वोट खरीदने का आरोप लगाया और प्रधानमंत्री पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार को दिल्ली संभालनी चाहिए, उसके बाद बंगाल पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि चुनाव में “इंच-इंच की लड़ाई” होगी और आने वाले दिनों में जनता भाजपा को करारा जवाब देगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / धनंजय पाण्डेय
