
–अधिकारियों की मिलीभगत से व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने का आरोप

–एरच में डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत सड़क चौड़ीकरण के लिए 30 करोड़ के ठेके का मामला
झांसी, 09 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी में प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी परियोजना डिफेंस कॉरिडोर सड़क चौड़ीकरण के मामले में घालमेल के आरोपों के चलते एक बार फिर सुर्खियों में है। शहर के एक के ग्रेड ठेकेदार फर्म द्वारा लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की निविदा प्रक्रिया में त्रुटि का आरोप लगाते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
एम.एस. बद्री प्रसाद मुद्गिल फर्म ने विभाग को प्रेषित पत्र में कहा है कि टेंडर निर्माण में हुई गलती के चलते उसे गलत तरीके से ‘नॉन-रिस्पॉन्सिव’ घोषित कर दिया गया, जो पूरी तरह अनुचित है।
फर्म का पत्र दिखाते हुए फर्म निदेशक रूपम मुदगिल ने बताया कि संबंधित कार्य डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत सड़क चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण से जुड़ा है। प्रारंभ में इस कार्य की अनुमानित लागत 28.50 करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में करेक्शन जारी कर 30 करोड़ रुपये कर दिया गया। फर्म का आरोप है कि 30 करोड़ या उससे अधिक लागत वाली निविदाओं में बैच मिक्स प्लांट अनिवार्य होता है, लेकिन विभाग द्वारा जारी शर्तों में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
फर्म ने यह भी कहा कि प्रहरी पोर्टल पर बैच मिक्स प्लांट अपलोड करने का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे निविदा प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति बनी रही। इसके बावजूद विभाग ने अन्य ठेकेदार की शिकायत के आधार पर फर्म को नॉन-रिस्पॉन्सिव घोषित कर दिया, जो संदेहास्पद प्रतीत होता है।
पत्र में आरोप लगाया गया कि विभाग ने कुछ ठेकेदारों के साथ मिलकर पूर्व नियोजित तरीके से कार्रवाई की है। फर्म ने मांग की है कि जिन ठेकेदारों ने बैच मिक्स प्लांट अपलोड किया है, उनकी श्रेणी (मशीनरी प्रमुख) की जानकारी सार्वजनिक की जाए। फर्म ने विभाग से नॉन-रिस्पॉन्सिव घोषित करने के आदेश को तत्काल निरस्त करने, निविदा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और न्याय प्रदान करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को बाध्य होंगे। जिसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी। यह मामला अब प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस मामले में संदेह होने पर ठेकेदार द्वारा 6 अप्रैल 2026 में ही आईजीआरएस पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी।
इस संबंध में कई बार अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी को फोन करने के बाबजूद फोन नहीं उठाया गया और न ही कोई जानकारी दी गई।
–ठेकेदारों ने अधिकारियों को किये फोन
शाम करीब 6 बजे से साढ़े सात बजे तक आवेदन करने वाले ठेकेदार अधीक्षण अभियंता पीडब्ल्यूडी के कार्यालय पर जा पहुंचे और सभी ने फोन भी लगाए। उनमें से एक ठेकेदार ने अधीक्षण अभियंता को फोन लगाकर जब पूछा कि आप कुछ भी स्पष्ट क्यों नहीं कर रहे, तो उन्होंने टाल दिया। धीरे धीरे पूरा कार्यालय खाली हो गया। आरोप है कि किसी अधिकारी के बंद कमरे में किसी अन्य ठेकेदार का अनुबंध कराया जा रहा था। हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी।
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया
