नई दिल्ली, 13 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित “दिल्ली राज्य प्रथम ऋण संगोष्ठी” में सहकारिता मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। संगोष्ठी में स्वदेशी उत्पाद, पारंपरिक कला और सहकारिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। संगोष्ठी में विभिन्न विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ एवं हितधारक उपस्थित रहे।

संगोष्ठी के दौरान राज्य फोकस पेपर 2026-27 का विमोचन, जीआई पंजीकरण को चयनित उत्पादों के लिए स्वीकृति पत्र वितरण, कारीगरों के उत्पादों के डिजिटल कैटलॉग का शुभारंभ तथा वित्तीय साक्षरता एवं कौशल विकास से संबंधित विभिन्न पहलों की प्रस्तुति दी गई।
इस अवसर पर सहकारिता मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने कहा कि भारत में उपलब्ध कच्चा माल और हमारे उत्पाद विश्व स्तर के हैं। सरकार निरंतर प्रयास कर रही है कि उचित मार्केटिंग, ब्रांडिंग और प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन उत्पादों को वह पहचान दिलाई जाए, जिसके वे हकदार हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो कपड़ा हमारे देश में सामान्य रूप से उपलब्ध है, वही विदेशों में ‘लिनन’ के रूप में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। यह दर्शाता है कि प्रभावी ब्रांडिंग और प्रस्तुति के माध्यम से हमारे उत्पादों की वैश्विक पहचान और मूल्य दोनों को बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वदेशी उत्पादों को सही मंच, व्यापक प्रचार और सशक्त ब्रांडिंग उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, जिससे वे वैश्विक स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकें। साथ ही, सरकार द्वारा उत्पादों के उचित मूल्यांकन और प्रभावी मार्केटिंग को सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न पहलें की जा रही हैं ताकि देश के कारीगरों और उत्पादकों को उनका उचित सम्मान और सशक्त बाजार उपलब्ध हो सके।
रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि भारत की पारंपरिक अर्थव्यवस्था सहयोग और विनिमय पर आधारित रही है और हमारी सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समय के साथ कई पारंपरिक कलाएं विलुप्त होती जा रही हैं जिन्हें पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि हमें कुछ नया करने के साथ-साथ अपनी पुरानी परंपराओं, प्रणालियों और सांस्कृतिक मूल्यों को पुनः सशक्त करना है ताकि देश की समृद्ध विरासत को संरक्षित रखते हुए विकास की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। उन्होंने कहा कि देश में क्षमता, संसाधन और मेहनती लोगों की कोई कमी नहीं है आवश्यकता केवल सही दिशा और सकारात्मक दृष्टिकोण की है।
मंत्री ने कहा कि अधिकतम लोगों की भागीदारी से अधिकतम श्रम उत्पन्न होगा और अधिकतम श्रम से ही देश की प्रगति संभव है। उन्होंने नाबार्ड से आग्रह किया कि दिल्ली सहित पूरे देश के लिए सहकारिता क्षेत्र का व्यापक आकलन किया जाए ताकि योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाया जा सके।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं ताकि इस संकल्प को वास्तविकता में बदला जा सके। भारत की समृद्ध संस्कृति, परंपराएं और स्थानीय कौशल हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं जिन्हें सशक्त बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है ताकि देश को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके।
अपने संबोधन के अंत में सहकारिता मंत्री रविन्द्र इन्द्राज सिंह ने नाबार्ड की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की संगोष्ठियां न केवल सहकारिता आधारित विकास मॉडल को मजबूती प्रदान करती हैं बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लक्ष्य को भी साकार करती हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से स्वदेशी उत्पादों, पारंपरिक कलाओं और स्थानीय कौशल को नई पहचान मिलेगी तथा देश ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / माधवी त्रिपाठी
