कोरबा /रायपुर, 13 अप्रैल (हि.स.)। हसदेव नदी में राख बहाने पर जल संसाधन विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए हसदेव ताप विद्युत परियोजना पर 18 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नदी को प्रदूषित करने के लिए की गई है, जो क्षेत्र की जीवन रेखा है। नदी में राख मिलने से जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को भारी नुकसान पहुंच रहा है।

यह कार्रवाई मुख्य अभियंता, मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना, बिलासपुर/कोरबा के माध्यम से की गई है। विभाग ने पर्यावरण प्रदूषण और नदी में जल की गुणवत्ता बनाए रखने के नियमों के तहत यह कदम उठाया है। विभाग की तकनीकी टीम ने मार्च 2026 के अंतिम सप्ताह में हसदेव नदी के पानी और बहाव क्षेत्र का सघन निरीक्षण किया था। जांच रिपोर्ट में प्रदूषण की पुष्टि होने के बाद, विभाग ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में 18 करोड़ रुपये के हर्जाने का आधिकारिक नोटिस और वसूली आदेश एचटीटी प्रबंधन को दिया है ।
राज्य सरकार का यह प्लांट छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी के अधीन संचालित होता है। आरोप है कि प्रबंधन द्वारा लगातार लापरवाही बरतते हुए राख (ऐश स्लरी) युक्त पानी हसदेव नदी में छोड़ा जा रहा था, जिससे न केवल नदी प्रदूषित हो रही थी, बल्कि जिले के अन्य उद्योगों और नगर निगम की जल शोधन प्रक्रिया पर भी असर पड़ रहा था।
इस संबंध में पहले नगर निगम आयुक्त ने कटघोरा एसडीएम को पत्र लिखकर प्रदूषण रोकने के निर्देश देने की मांग की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए और टीम गठित की। जांच के बाद सिंचाई विभाग ने एटीपीपी प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करते हुए 18 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। अधिकारियों का कहना है, यह कार्रवाई नदी में प्रदूषण फैलाने और नियमों के उल्लंघन को देखते हुए की गई है।
निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय ने बताया, राखड़युक्त पानी नहर में छोड़े जाने से जल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा। इस संबंध में कटघोरा एसडीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई के लिए कहा गया था। उन्होंने बताया, मामले में पर्यावरण संबंधी प्रावधानों का भी उल्लंघन हुआ है।
दरअसल कुछ दिन पहले ही राखड़ बांध से रिसाव की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, जिससे स्थिति और बिगड़ी। अब जांच टीम पूरे मामले की पड़ताल कर रही है और अंतिम रिपोर्ट के बाद अन्य आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है, भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए, इसके लिए सख्ती बरती जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह दंड प्रदूषित किए गए पानी की मात्रा के तीन गुना के आधार पर निर्धारित किया गया है।
कोरबा के दर्री स्थित हसदेव थर्मल पावर स्टेशन , जिसे सीएसईबी कोरबा पश्चिम के नाम से भी जाना जाता है, छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख कोयला आधारित बिजली संयंत्र है। यह हसदेव नदी के किनारे स्थित है। संयंत्र में 840 मेगावाट और 500 मेगावाट की इकाइयां हैं, जो राज्य को बिजली की आपूर्ति करती हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा
