—नारी सशक्तिकरण का सशक्त संदेश,नारी शक्ति वंदन अधिनियम-प्रचार अभियान

वाराणसी, 16 अप्रैल (हि.स.)। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि नारी शक्ति राष्ट्र की आधारशिला है और महिलाओं की सक्रिय सहभागिता के बिना लोकतंत्र की कल्पना भी अधूरी है। कुलपति प्रो. शर्मा गुरूवार अपरान्ह में विश्वविद्यालय के योग साधना केंद्र में आयोजित “नारी शक्ति वंदन अधिनियम-प्रचार अभियान” विषयक गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो. शर्मा ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं को राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि अग्रसेन महिला पीजी कॉलेज वाराणसी की प्राचार्य डॉ. मिथिलेश सिंह ने कहा कि नारी शिक्षा और आत्मनिर्भरता ही सशक्त समाज का मूल आधार है, तथा इस प्रकार के अभियान महिलाओं में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास करते हैं। उन्होंने शक्ति वंदन के संदर्भ में काशी की परंपरा का उल्लेख कर कहा कि ‘नमः पार्वती पतये हर-हर महादेव’ का उदघोष किया जाता है, जिसमें नारी और पुरुष को एक-दूसरे के पूरक रूप में स्वीकार किया गया है। यह मंत्र इस बात का प्रतीक है कि सृष्टि और समाज के संतुलन में स्त्री और पुरुष दोनों की समान एवं संयुक्त भूमिका है। नारी को पुरुष के साथ जोड़कर देखा जाना ही भारतीय संस्कृति की उस उच्च भावना को प्रकट करता है, जहाँ दोनों मिलकर जीवन के पूर्णत्व का निर्माण करते हैं।”
गोष्ठी में राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय, चौकाघाट की प्राचार्या डॉ. नीलम गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि अवसर और मंच भी मिलना आवश्यक है, ताकि वे समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें। आज समाज के साथ-साथ परिवार भी महिलाओं को उचित सम्मान और महत्व देने लगा है। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का सहयोग और प्रोत्साहन न मिला होता, तो आज वे न तो एक सफल चिकित्सक बन पातीं और न ही किसी महाविद्यालय का कुशलतापूर्वक नेतृत्व कर पातीं।
इसके पहले कार्यक्रम की नोडल अधिकारी प्रो. विद्या कुमारी ने अतिथियों का स्वागत कर कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का प्रतीक है, जो महिलाओं को सशक्त और स्वावलंबी बनाने की दिशा में प्रेरित करता है। इस अवसर पर अन्य वक्ताओं ने नारी सशक्तिकरण, समान अधिकार एवं सामाजिक समता पर अपनी बात रखी। धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुमिता ने किया। गोष्ठी में प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, प्रो. अमित कुमार शुक्ल, डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी सहित छात्रों ने भी पूरे उत्साह से भागीदारी की।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी
