शिमला, 19 अप्रैल (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक अहम कार्रवाई करते हुए चेस्टर हिल्स दो और चेस्टर हिल्स चार परियोजनाओं के प्रमोटरों पर कुल 70 लाख रुपये का अंतरिम जुर्माना लगाया है। अथॉरिटी ने दोनों प्रोजेक्ट्स के खिलाफ अलग-अलग आदेश जारी करते हुए 35-35 लाख रुपये की पेनल्टी निर्धारित की है। यह कार्रवाई रेरा अधिनियम 2016 की धारा 4(2)(l)(डी ) के उल्लंघन के आधार पर की गई है, जिसमें प्रमोटरों के लिए आवंटियों (फ्लैट खरीदारों) से प्राप्त धनराशि और परियोजना पर हुए खर्च का सही और पारदर्शी लेखा-जोखा रखना अनिवार्य होता है।

प्राथमिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण में यह सामने आया कि दोनों परियोजनाओं में फंड के उपयोग और खातों के रखरखाव में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। रेरा नियमों के अनुसार प्रमोटरों को परियोजना के लिए एक अलग बैंक खाता रखना होता है, जिसमें आवंटियों से प्राप्त राशि जमा की जाती है और उसी खाते से निर्माण एवं अन्य कार्यों पर खर्च किया जाता है। लेकिन चेस्टर हिल्स टू और फोर में इस प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं, जिससे आवंटियों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी।
इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए एचपी रेरा ने रेरा अधिनियम की धारा 60 के तहत यह अंतरिम दंड लगाया है।
उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई स्वतः संज्ञान के तहत शुरू की गई थी और अभी भी प्राधिकरण के समक्ष कार्यवाही जारी है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल प्रारंभिक कदम है और जांच पूरी होने के बाद प्रमोटरों पर और भी कड़ी कार्रवाई संभव है।
एचपी रेरा ने यह भी संकेत दिया है कि अन्य संभावित उल्लंघनों की जांच जारी है, जिनमें धारा 11 के तहत प्रमोटरों की जिम्मेदारियां, धारा 14 के तहत स्वीकृत नक्शों एवं डिजाइनों से किसी भी प्रकार का विचलन तथा धारा 17 के तहत कम्प्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त किए बिना आवंटियों को कब्जा सौंपना शामिल है। यदि संबंधित विभागों से प्राप्त रिपोर्टों में ये उल्लंघन प्रमाणित होते हैं, तो प्रमोटरों को अतिरिक्त आर्थिक दंड, परियोजना पंजीकरण पर कार्रवाई या अन्य दंडात्मक कदमों का सामना करना पड़ सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील शुक्ला
