खूंटी, 21 अप्रैल (हि.स.)। पेसा नियमावली–2025 में सुधार की मांग को लेकर मंगलवार को जिला समाहरणालय के समक्ष झारखंड उलगुलान संघ के तत्वावधान में एक दिवसीय महा धरना आयोजित किया गया।

महाधरना में जिले के विभिन्न पड़हा के पदाधिकारी, पारम्परिक ग्राम अगुवे तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
धरना को संबोधित करते हुए झारखण्ड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली तो बना दी है, लेकिन उसके क्रियान्वयन में कई विसंगतियां नजर आ रही हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पेसा कानून की मूल भावना और पारम्परिक ग्राम स्वशासन के विपरीत नियमावली बनाई गई है। केवल नीति-नियम में पारम्परिक ग्राम सभा लिख देने से वह पारम्परिक नहीं हो जाता, उसके अनुरूप अधिकार भी देने होंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमावली के माध्यम से पारम्परिक ग्राम सभा को ग्राम पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन बना दिया गया है। बोदरा ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दो माह के भीतर पेसा नियमावली में आवश्यक सुधार नहीं किया गया और आदिवासी हितों से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों, कानूनी अधिकारों व न्यायिक आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
इस अवसर पर कोल्हान आदिवासी एकता मंच के कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश चन्द्र सोय ने संविधान की पांचवीं अनुसूची की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन एवं नियंत्रण के लिए विशेष प्रावधान है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल को विशेषाधिकार प्राप्त है कि वे अनुसूचित क्षेत्रों के शांति व सुशासन के विपरीत बनाए गए कानूनों या नीतियों के क्रियान्वयन पर रोक लगा सकते हैं तथा आवश्यकतानुसार अपवाद व उपांतरण के अनुरूप अध्यादेश जारी कर सकते हैं।
महा धरना के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से मुलाकात कर अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त एवं अंचलाधिकारी की उपस्थिति में राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा संबंधित विभागीय मंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
कार्यक्रम को पड़हा राजा सनिका भेंगरा, दुबिय कंडुलना तोरपा प्रमुख रोहित सुरीन, जोन जुरसेन गुड़िया, पौलुस तोपनो, सुबोध पूर्ति, फूलचंद टूटी, सलिल कोनगाड़ी, कल्याण गुड़िया, एतवा मुंडा, आशीष गुड़िया, जोसेफ हस्सा, मरकस मुंडू सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा
