राज्य के लगभग 32 लाख घरों में अब तक रसोई गैस (एलपीजी) की पहुंच नहीं हो सकी है। रसोई गैस के विकल्प में लोग लकड़ी, गोईठा आदि का उपयोग कर रहे हैं। तेल कंपनियों को आंकड़ो भी बताते हैं कि राज्य के लगभग 12 प्रतिशत घरों तक स्वच्छ ईंधन की पहुंच नहीं हो सकी है।

तेल कंपनियों के 1 अगस्त 2023 तक आंकड़ो के अनुसार राज्य में घरेलु गैस सिलेंडर कनेक्शन 2 करोड़ 15 लाख 27 हजार है, जबकि तेल कंपनियों द्वारा राज्य में घरों की अनुमानित सख्या 2 करोड़ 47 लाख 14 हजार बताई गयी है। तेज कंपनियों के आंकड़े कोही मानें तो राज्य 31 लाख 87 हजार घरों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच नहीं हो सकी है। एलपीजी वितरक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. राम नरेश सिन्हा इसका कारण राज्य मेंगरीबी रेखा से नीचे के परिवारों की संख्या अधिक होना बताते हैं। उनका कहना है कि ऐसे परिवारों की क्रय क्षमता बहुत कम है। इनका भोजन पेड़ के पतों, लकड़ियों, गोइठा आदि को जलाकर बनता है।

